माता रूपेण सा देवी, भगिनी स्नेहवर्धिनी अर्थात् नारी मां के रूप में देवी है, बहन के रूप में स्नेह बढ़ाने वाली भी है। ऐसे ही कई रूप मथुरा की रहने वाली राजेश्वरी के है, जो 48 साल की उम्र में भी 252 बच्चों की मां, दोस्त, बहन, बुआ का किरदार जीवन में निभा रहीं हैं। सुबह उठाने से लेकर उनके खाने-पीने, पढ़ाई-लिखाई, बीमारी में दवा देने और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने तक, राजेश्वरी देवी हर पल इन बच्चों के साथ रहती हैं, जो महिला प्रभुजी अपने मानसिक संतुलन खो चुकीं हैं अपने बच्चों को संभाल नहीं पाती, उन मासूमों की दुनिया संवारने में लगी हुईं हैं। निराश्रित बच्चों को ही दिया मां का प्यार राजेश्वरी बताती है कि शादी के बाद बच्चे न होने से जीवन में एक कमी महसूस होने लगी थी। हर वक्त अपनाघर के प्रभुजी याद आते थे। इसलिए मैं अपने पति संजीव बंसल के साथ साल में एक बार अपनाघर आने लगी,जिसके बाद भी प्रभुजी की सेवा करने का संकल्प और अधिक मजबूत हो गया। 2 साल तक पति और परिवार को मनाने के बाद साल 2025 जनवरी में अपना घर में फिर से नया सफर शुरू किया और जून 2025 में बाल सदन की इंचार्ज बनीं।


