अंतिम तिथि एक महीने बढ़ेगी:सिविल जज भर्ती में स्टेट बार में पंजीयन अनिवार्य सुप्रीम कोर्ट में 18 तो हाईकोर्ट में 7 अप्रैल को सुनवाई

हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा-2024 के ऑनलाइन फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख एक महीने बढ़ाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आयोग को यह भी निर्देश दिया कि अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत नहीं होने वाले उम्मीदवारों को भी आवेदन करने की अनुमति दी जाए। हालांकि, इन उम्मीदवारों की भर्ती प्रक्रिया को याचिका के अंतिम निर्णय से बाधित रखा गया था। इधर, बुधवार को हाई कोर्ट में बताया गया कि समान मामले पर सुप्रीम कोर्ट में भी एसएलपी लगाई गई है। इस पर 18 मार्च को सुनवाई होनी है, इसे देखते हुए हाई कोर्ट ने 7 अप्रैल को अगली सुनवाई तय की है। जबलपुर की विनीता यादव ने हाई कोर्ट में प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ पीएससी की सिविल जज परीक्षा में अधिवक्ता पंजीयन की अनिवार्यता को चुनौती दी थी। बताया कि उसने रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी, जबलपुर से विधि स्नातक किया है और वर्तमान में सरकारी नौकरी में कार्यरत है। उसने बताया कि पूर्णकालिक सरकारी नौकरी के कारण वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत अधिवक्ता के रूप में पंजीयन नहीं करा सकती। याचिका में छत्तीसगढ़ के विधि एवं विधायी कार्य विभाग की 5 जुलाई 2024 की अधिसूचना को भी चुनौती दी गई है। इस अधिसूचना में सिविल जज परीक्षा के लिए विधि स्नातक के साथ बार काउंसिल में अधिवक्ता पंजीयन अनिवार्य किया गया है। विनीता ने 23 दिसंबर 2024 को जारी छत्तीसगढ़ पीएससी के विज्ञापन को भी गलत बताया। उसने कहा कि पुराने नियमों के तहत वह आवेदन के योग्य थी, लेकिन संशोधन के कारण अब अपात्र हो गई है। याचिका में यह भी कहा गया कि हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में ऐसी कोई शर्त नहीं है। मध्य प्रदेश में सिविल जज परीक्षा में अधिवक्ता होना वैकल्पिक है। 2006 के नियमों या विज्ञापन में इस तरह की शर्त लगाने का कोई औचित्य नहीं है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ बनाम भारत संघ मामले में भी इसी मुद्दे पर सुनवाई चल रही है। यह मामला 4 मार्च 2025 को सूचीबद्ध था और अगली सुनवाई 18 मार्च 2025 को होगी। हाई कोर्ट ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए याचिका पर फिलहाल रोक लगा दी है और इसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक लंबित रखा है। अब मामले पर 7 अप्रैल को सुनवाई तय की गई है। इधर, मासूम की हत्या के दोषी की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली चार साल के मासूम की हत्या के दोषी की फांसी की सजा को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। रायपुर के 7वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 364 और 302 के तहत दोषी ठहराया था। कोर्ट ने उसे पांच साल की कैद और 500 रुपये जुर्माना, दस साल की कैद और 500 रुपये जुर्माना तथा मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान था। इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। कोर्ट ने कहा कि दोषी की उम्र 35 साल है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में मृत्युदंड की जगह उम्रकैद की सजा पर्याप्त होगी। रायपुर के उरला थाना क्षेत्र में रहने वाली पुष्पा चेतन ने 5 अप्रैल 2022 को अपने चार साल के बेटे हर्ष कुमार चेतन की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया कि पड़ोसी पंचराम उसके दोनों बेटों दिव्यांश और हर्ष को घुमाने ले गया था। कुछ देर बाद दिव्यांश को लौटा दिया, लेकिन हर्ष को अपने साथ ले गया। देर रात तक हर्ष घर नहीं लौटा तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। पुलिस ने जांच में पंचराम का मोबाइल नंबर ट्रेस किया। उसकी लोकेशन नागपुर मिली। 7 अप्रैल 2022 को पुलिस ने उसे नागपुर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि उसने हर्ष की हत्या कर दी और शव को नेवनारा और अकोली खार के पास जला दिया। पुलिस ने 8 अप्रैल 2022 को पंचराम की निशानदेही पर अधजला शव बरामद किया। मृतक के पिता जयेन्द्र चेतन ने शव की पहचान की। हाई कोर्ट ने कहा- यह रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं
हाई कोर्ट ने पंचराम के अपराध को जघन्य मानते हुए कहा है कि उसने मासूम बच्चे की निर्ममता से हत्या की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि यह रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला नहीं है, जिसमें फांसी की सजा दी जाए। हाई कोर्ट ने फैसले में कहा है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में मृत्युदंड की सजा उचित नहीं है। हमारा विचार है कि यह दुर्लभतम मामला नहीं है जिसमें मृत्युदंड की बड़ी सजा की पुष्टि की जानी है। आजीवन कारावास पूरी तरह से पर्याप्त होगा और न्याय के उद्देश्यों को पूरा करेगा। आराेपी अब वह पूरी जिंदगी जेल में रहेगा।

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