अंधविश्वास या आस्था, आदिवासी समाज में अनोखी रस्म:ऊपरी दांत पहले निकलने पर सशंकित थे परिजन, ग्रहदोष मिटाने के लिए मादा कुत्ते से करवा दी शादी

आदिवासी समाज में अंधविश्वास आज भी कायम है। इसका जीता जागता उदाहरण रविवार को शंकोसाई रोड नंबर 5 में मागे पर्व के अंतिम दिन ‘हरमंगेया’ पर देखने को मिला। हो समाज के लोगों ने दो छोटे बच्चों की प्रतीकात्मक शादी मादा कुत्ते से कराई। वह इसलिए क्योंकि इन बच्चों के मुंह में ऊपर के दांत पहले निकल आए हैं। समाज का मानना है कि यह अशुभ ग्रह का संकेत है। इस दोष के निवारण के लिए परंपरागत रूप से कुत्ते या कुतिया से विवाह कराया जाता है, ताकि भविष्य में किसी अनहोनी या दुर्घटना की आशंका टल सके। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जो आज भी बरकरार है। गाजे-बाजे के साथ बस्ती में बारात निकली हेंब्रम के चार वर्षीय बेटे रूपेश हेंब्रम और लक्ष्मण सोय के दो वर्षीय बेटे सूर्य सोय की अलग-अलग बारात निकाली गई। बस्ती के लोग इसमें जमकर थिरके। गाजे-बाजे के साथ बस्ती में बारात निकली, जिसमें समाज के लोग शामिल हुए। शादी से पूर्व समधी मिलन, मंगनी, हल्दी और पांव पूजा की रस्में निभाई गईं। इसके बाद साड़ पेड़ के नीचे विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया गया। समाज की मान्यता है कि साड़ पेड़ के नीचे विवाह होने से बच्चों का ग्रह दोष पेड़ ग्रहण कर लेता है और दोष समाप्त हो जाता है। इधर, उलीडीह में 1 मार्च को हरमंगेया मनाया जाएगा, जिसमें फिर से ऐसे अनुष्ठान होने की तैयारी है। ग्रह दोष से मुक्ति की परंपरा
उलीडीह के ग्राम दिउरी (पुजारी) प्रकाश सुंडी के अनुसार हो समाज में जिन बच्चों के ऊपर के दांत पहले निकलते हैं, इसे अशुभ ग्रह का संकेत माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे बच्चों के जीवन में भविष्य में किसी अनहोनी या दुर्घटना की आशंका रहती है। इस ग्रह दोष को दूर करने के लिए बच्चों की शादी कुत्ते या कुतिया से कराई जाती है। यह विशेष रस्म पूरे वर्ष में केवल मागे पर्व के अंतिम दिन ‘हरमंगेया’ पर ही संपन्न होती है।

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