अकाल तख्त जत्थेदार गड़गज और ज्ञानी टेक सिंह तनखैया घोषित:पटना साहिब के पंज प्यारों ने की कार्रवाई, सुखबीर बादल को पेश होने के आदेश

सिख धर्म के पांच तख्तों में शामिल पटना साहिब के पंज प्यारे सिंह साहिबान ने अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और दमदमा साहिब तख्त के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह को ‘तनखैया’ घोषित कर दिया है। इन दोनों पर यह कार्रवाई तख्त की मर्यादा और गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोपों के बाद बुधवार को की गई। इसके साथ ही पटना साहिब तख्त के पंज प्यारों ने शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल को तख्त पर पेश होने के आदेश दिए हैं। तख्त पटना साहिब से जारी आदेश के अनुसार, पंज प्यारे साहिबान ने एक विशेष बैठक में दोनों जत्थेदारों के आचरण की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान पाया गया कि दोनों ने तख्त पटना साहिब से पहले जारी किए जा चुके हुक्मनामों का उल्लंघन किया और तख्त के खिलाफ एक अनधिकृत हुक्मनामा जारी किया। सिख पंथ के धार्मिक कानूनों के तहत ‘तनखैया’ घोषित किया पंज प्यारों ने अपनी समीक्षा में पाया कि अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह ने तख्त की मर्यादा, परंपराओं, धार्मिक आचार संहिता और स्वतंत्रता का उल्लंघन किया है। इसलिए दोनों को सिख पंथ के धार्मिक कानूनों के तहत ‘तनखैया’ घोषित किया गया है। सिख पंथ में कुल पांच तख्त हैं और इन्हें सुप्रीम माना गया है। इनमें अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), तख्त दमदमा साहिब (तलवंडी साबो), तख्त केसगढ़ साहिब (आनंदपुर), तख्त हरिमंदर साहिब पटना (बिहार) और तख्त हजूर साहिब (नांदेड़, महाराष्ट्र) शामिल है। इन पांचों तख्तों में अकाल तख्त साहिब सिख पंथ का पहला तख्त है। सुखबीर सिंह बादल को भी भेजा गया समन पंज प्यारों ने इस पूरे विवाद में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल की संलिप्तता पर गंभीर आपत्ति उठाई। पंज प्यारों ने सुखबीर बादल को आदेश दिया कि वह अगले 10 दिन में पटना साहिब में व्यक्तिगत रूप से पंज प्यारों के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखें। आदेश में यह भी कहा गया कि अगर सुखबीर बादल पंज प्यारों के इस आदेश का पालन नहीं करते हैं तो सिख मर्यादा के अनुसार उनके विरुद्ध सख्त धार्मिक कार्रवाई की जाएगी। गैरकानूनी फरमानों को मान्यता नहीं पंज प्यारों ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और ज्ञानी टेक सिंह की ओर से तख्त पटना साहिब के मैनेजमेंट बोर्ड को अकाल तख्त पर बुलाने के लिए जारी किया गया हुक्मनामा अमान्य है। आदेश में तख्त पटना साहिब की मैनेजमेंट कमेटी और प्रशासनिक बोर्ड को निर्देश दिए गए कि वह गड़गज के फरमान को न मानें और तख्त की धार्मिक संप्रभुता से समझौता न करें। तख्तों के बीच विवाद बढ़ा इस पूरे घटनाक्रम से सिख पंथ में अकाल तख्त और पटना साहिब तख्त के बीच अधिकारों और वैधता को लेकर चल रहे टकराव को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस विवाद का असर आने वाले समय में सिखों की पंथक सियासत और धार्मिक नेतृत्व पर पड़ सकता है। 2010 में भी पटना साहिब से जारी हुए थे आदेश तख्त पटना साहिब और अकाल तख्त के बीच ऐसी नौबत पहले भी बन चुकी है। वर्ष 2010 के आसपास पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह ने अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को तनखैया घोषित कर दिया था। उस समय पंजाब के CM रह चुके प्रकाश सिंह बादल के परिवार ने दोनों तख्तों के बीच सुलह करवाई थी।

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