डूंगरपुर में REET परीक्षा के दौरान ब्राह्मण अभ्यर्थियों की जनेऊ उतरवाने के मामले में बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने मंगलवार को भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के ‘कर्मचारियों को अक्ल लगाने’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि अक्ल कर्मचारियों को नहीं, सरकार को लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विवाद सरकार की अस्पष्ट गाइडलाइन के कारण हुआ है। सरकार ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए सांसद रोत ने कहा कि सरकार ने परीक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने सरकारी गाइडलाइन और जिला स्तरीय प्रशिक्षण के अनुसार काम किया। महिलाओं के मंगलसूत्र समेत सभी जाति-वर्गों के अभ्यर्थियों के हाथ, पैर और गले में बंधे धार्मिक धागे उतरवाए गए। आस्था को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं डूंगरपुर में ड्यूटी कर रहे कुछ समाज विशेष के कर्मचारियों को निलंबित कर लाइन हाजिर किया गया है। बीएपी ने इस कार्रवाई की निंदा की है। सांसद ने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समाज की आस्था को ठेस पहुंचाना उनका उद्देश्य नहीं है। उन्होंने सरकार से सभी समुदायों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की मांग की है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के बयान पर पलटवार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के ‘कर्मचारियों को अक्ल लगाने’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए रोत ने कहा कि अक्ल कर्मचारियों को नहीं, सरकार को लगानी चाहिए। उन्होंने परीक्षा के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसा कोई भ्रम न हो। कड़ी जांच के दौरान उतरवाए जनेऊ 28 फरवरी को REET के दूसरे दिन परीक्षार्थियों की कड़ी जांच के दौरान पुनाली के स्वामी विवेकानंद कॉलेज में हेमेंद्र कुमार जोशी और मयंक पुरोहित की जनेऊ उतरवाई गई थी। इसी तरह सुंदरपुर सेंटर पर पिंकल उपाध्याय की जनेऊ उतरवाने का मामला सामने आया। विप्र फाउंडेशन सहित कई संगठनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी। जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने जांच के बाद सुंदरपुर केंद्र की सुपरवाइजर सुनीता कुमारी को सस्पेंड और पुनाली केंद्र के हेड कॉन्स्टेबल शिवलाल को लाइन हाजिर कर दिया।


