भास्कर न्यूज | गिरिडीह. बरगंडा स्थित वनवासी विकास आश्रम में मंगलवार को बाल विवाह रोकथाम को लेकर प्रेस वार्ता हुई। आश्रम के सचिव सुरेश शक्ति ने बताया कि अक्षय तृतीया पर जिले में बाल विवाह रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की से विवाह कर यौन संबंध बनाना पॉक्सो एक्ट के तहत बलात्कार की श्रेणी में आता है। संगठन ने बताया कि बाल विवाह रोकने के लिए जिले के धर्मगुरुओं, पुरोहितों, मौलवियों और पादरियों का सहयोग मिल रहा है। अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को है। इस दिन जिले के मंदिरों और धर्मशालाओं में बड़ी संख्या में विवाह होते हैं। इसे देखते हुए वनवासी विकास आश्रम ने मंदिरों के पुजारियों और धर्मशालाओं के प्रबंधकों से संपर्क कर बाल विवाह रोकने में सहयोग मांगा है। संगठन ने बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोग से जिले में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सभी धर्मगुरुओं ने इस पहल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी बाल विवाह बिना पुरोहित के नहीं हो सकता, इसलिए धर्मगुरुओं को अभियान से जोड़ा गया है। अब तक मिले सकारात्मक परिणामों को देखते हुए उम्मीद है कि इस बार अक्षय तृतीया पर जिले में एक भी बाल विवाह नहीं होगा। संगठन ने जिले के अधिकतर मंदिरों और मस्जिदों के बाहर बाल विवाह रोकथाम के बोर्ड लगाए हैं। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन देश के 416 जिलों में 250 से ज्यादा संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। अब तक दो लाख से ज्यादा बाल विवाह रुकवाए गए हैं। पांच करोड़ से ज्यादा लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई गई है। गिरिडीह में वनवासी विकास आश्रम ने 2023-24 में स्थानीय प्रशासन के सहयोग से 565 अभिभावकों से अंडरटेकिंग लेकर बाल विवाह रुकवाए हैं। बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत 5 प्राथमिकी दर्ज करवाई गई हैं। प्रेस वार्ता में रूपा कुमारी और भागीरथी देवी मौजूद थे।


