भास्कर न्यूज | अमृतसर निगम हाउस की मीटिंग अगले सप्ताह बुलाना लगभग तय हो चुका है। अलग-अलग विभागों से एजेंडा ब्रांच को 20 दिन में 19 तरह के एजेंडे मिल चुके हैं। वहीं, मेयर जतिंदर सिंह भाटिया ने निगम कमिश्नर को लैटर लिखा है कि तैयार हो चुके एजेंडा की फाइनल लिस्ट जल्द से जल्द भेजी जाए ताकि मीटिंग की डेट फिक्स की जा सके। कमिश्नर दफ्तर से एजेंडा ब्रांच को लैटर भेजकर बुधवार शाम 4 बजे तक रिपोर्ट तलब की गई है। मेयर जतिंदर सिंह मोती भाटिया ने बताया कि हाउस की मीटिंग को लेकर जल्द ही डेट फिक्स करेंगे। डवलपमेंट से जुड़ा कोई भी जरूरी काम छूटना नहीं चाहिए। इसलिए कमिश्नर को लैटर लिखा था कि जो भी एजेंडा तैयार किया जा चुका है, उसकी फाइनल लिस्ट सौंपी जाए। यदि कोई जरूरी काम होंगे तो उसे भी एजेंडा में डाला जाएगा। एक ओर मेयर विकास कार्यों को लेकर गंभीर नजर आ रहे है तो दूसरी ओर हेल्थ विभाग ने 2 बड़े प्रोजेक्टों डेयरी कॉप्लेक्स में सीएनजी प्लांट लगाने और झब्बाल डंप के बायोरेमेडिशन टेंडर का एजेंडा तैयार कर एजेंडा ब्रांच को अब तक नहीं भेजा है। यदि विभागों की तरफ से एजेंडा भेजने में लापरवाही का यही हाल रहा तो कई जरूरी प्रोजेक्ट अधर में लटक जाएंगे। गनीमत है कि मेयर खुद सारे एजेंडों की लिस्ट चेक करेंगे कि शहर के विकास को लेकर कुछ रह तो नहीं गया है। जिसके बाद संबंधित विभाग के हैड को निर्देश दिया जाएगा कि एजेंडा शामिल करें। दरअसल, मीटिंग बुलाने की जानकारी 72 घंटे पहले पार्षदों को देनी होती है। ऐसे में इस सप्ताह तो मीटिंग नहीं बुलाई जा सकती। वहीं, मीटिंग बुलाने की सुगबुगाहट के बाद पार्षदों की तरफ से टेबल एजेंडा तैयार कराना शुरू कर दिया गया है ताकि हाउस की मीटिंग में अपने वार्डों के विकास से जुड़ा काम पास करा सकें। जिसमें अधिकतर सीवरेज जाम, गंदा पानी, सड़कें, नालियां-गलियां जैसी समस्याएं शामिल हैं। कोई नया और बड़ा प्रोजेक्ट अब तक एजेंडा ब्रांच में नहीं पहुंचा है। गौर हो कि हाउस की पहली मीटिंग 29 मार्च-2025 में हुई थी। जिसमें 459.45 करोड़ रुपए का बजट तो 22 करोड़ रुपए से डवलपमेंट कामों का एजेंडा पास हुआ था। बता दें कि हाउस बनने के बाद सिर्फ एक बार मीटिंग बुलाई जा सकी है जबकि 2 बार वित्त ठेका कमेटी की मीटिंग हुई है। पहली मीटिंग 29 मार्च 2025 को बुलाई गई थी। वहीं 15 जुलाई 2025 को वित्त-ठेका कमेटी की पहली तो 26 सितंबर 2025 को दूसरी मीटिंग हुई है। वाटर सप्लाई का कनेक्शन किसी भी कामर्शियल अदारों ने लिया है और मीटर खराब हो तो 3 माह में ठीक कराना होगा। विभाग की चेकिंग में मीटर खराब होने, टूटने या जाम वाले हालत में पाए गए तो 3 गुना बिल अदा करना होगा। दरअसल, वाटर सप्लाई विभाग 3 माह में मीटर ठीक को नोटिस भेजता था। नोटिस को दरकिनार करने पर 200 रुपए बिल लिया जाता था लेकिन अब मीटर खराब पाए गए तो तीन गुना यानि कि 600 रुपए बिल विभाग वसूलेगा। इस बारे एजेंडा तैयार कर एजेंडा ब्रांच को भेज दिया गया है। हाउस में मता पास होने के बाद लागू हो जाएगा। वहीं अलग-अलग विभागों की ओर से एजेंडों में कुछ ट्रांसफर-प्रमोशन से जुड़े हैं। वहीं पार्षदों का कहना है कि जल्द मीटिंग बुलाई जानी चाहिए ताकि लोगों की समस्याओं को रखने का मौका मिल सके।


