अत्याचारों से बचाने के लिए जल देवता वरुण के अवतार में प्रकट हुए थे भगवान झूलेलाल

चेटीचंड सिंधी मेला समिति ने चेटीचंड महोत्सव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। रविवार को मोतीडूंगरी गणेशजी को चेटीचंड सिंधी मेले का निमंत्रण दिया है। महोत्सव की शुरुआत 1 मार्च से होगी। चेटीचंड पर्व पर भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है। सिंधी समाज में धार्मिक मान्यता है कि मुगल शासन काल में हिंदुओं पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जा रहा था। पीड़ित समाज ने 40 दिनों तक जल देवता वरुण की आराधना की। तपस्या के फलस्वरूप भगवान झूलेलाल ने अवतार लेकर समाज की रक्षा की। अमरापुर स्थान के संत मोनू महाराज ने बताया कि विक्रम संवत 1007 में हिंदू समाज पर अत्याचार बढ़ा तो वरुण अवतार के रूप में भगवान झूलेलाल प्रकट हुए और सत्य, न्याय एवं मानवता का संदेश दिया। तब से सिंधी समाज आराध्य के रूप में भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना कर रहा हैं और चेटीचंड महोत्सव मना रहा। जयपुर में 70 साल पहले सिंध से विस्थापित होकर जयपुर आए तब से शहर में जगह-जगह चेटीचंड महोत्सव के आयोजन हो रहे हैं। भगवान झूलेलाल को जल देवता वरुण का अवतार माना जाता है। तुलसी संगतानी ने बताया कि समिति अध्यक्ष नरेंद्र मूलचंदानी की अध्यक्षता में मोती डूंगरी से श्री झूलेलाल मंदिर सेक्टर-2 मालवीय नगर तक वाहन रैली निकाली गई। कार्यक्रम संयोजक ललित राजू ने बताया कि श्री झूलेलाल मंदिर पहुंचकर भगवान वरुणावतार श्री झूलेलाल का विशेष पूजा की। इस दौरान पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहुजा, महासचिव प्रमोद नावानी, कोषाध्यक्ष दीपक वरदानी, पखवाड़ा सचिव अर्जुनदास मेहरचंदानी और मुख्य समन्वयक हरीश असरानी, गिरधारी मनकानी, चंदीराम राघानी, चंद्रप्रकाश खेतानी, धर्मदास मोटवानी, गोबिंद रामनानी, जितेंद्र लखवानी, मनोज ठाकवानी, जेठानंद नंदवानी सहित कई लोग मौजूद रहे। 1 मार्च से पखवाड़ा कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। 13 मार्च को लाल जा लाडा (खुशी के गीत), 15 मार्च को दशहरा मैदान आदर्श नगर में सिंधु मेला, 18 मार्च को कलशयात्रा गोविंद देवजी मंदिर से आरंभ होकर कंवर नगर झूलेलाल मंदिर पहुंचेगी। 20 मार्च को चौगान स्टेडियम से शोभायात्रा निकलेगी, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए कंवर नगर स्थित श्री झूलेलाल मंदिर पहुंचेगी।

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