अधूरा सोन नदी पुल…:2 करोड़ से दो स्लैब ढाले, 3 और के लिए 8 साल से इंतजार

गांव-गांव को पक्की सड़क और पुल से जोड़ने के सरकारी दावों की पोल सक्ती जिले के लालमाटी-भनेतरा क्षेत्र में खुल रही है। सोन नदी पर करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा पुल पिछले 8 साल से अधूरा खड़ा है। हालत यह है कि अब तक केवल 2 स्लैब ही डाले जा सके हैं और 3 स्लैब के अभाव में पूरा निर्माण अटका हुआ है। यहां ग्रामीणों के लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद 2015-16 में पुल निर्माण को मंजूरी मिली थी। लोक निर्माण विभाग (सेतु संभाग) की ओर से टेंडर जारी किया गया। ठेका नटराज इंफ्रा बिल्डकॉन कंपनी को मिला। यहां शुरुआत में काम तेजी से चला और कंपनी ने नदी पर पांच स्पान (खंभे) तैयार कर दिए। इसी दौरान फाउंडेशन डिजाइन में बदलाव हुआ, जिससे लागत बढ़ गई। कंपनी ने निर्धारित राशि में अपने हिस्से का काम पूरा होने का दावा करते हुए काम बंद कर दिया। अब स्थिति यह है कि पुल का करीब 70 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन शेष काम के लिए फंड उपलब्ध नहीं होने से 3 स्लैब नहीं डाले जा सके हैं। नतीजतन, अधूरा पुल नदी के बीच खड़ा होकर लोगों को हर दिन अधूरी व्यवस्था का अहसास करा रहा है। इस अधूरेपन की कीमत 20 से अधिक गांवों के करीब 40 हजार लोगों को चुकानी पड़ रही है। ग्रामीणों को रोजाना 7 किमी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, किसानों और रोज कमाने-खाने वालों के लिए यह दूरी परेशानी का सबब है। बरसात के दिनों में हालत और भी खराब हो जाती है, जब नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन ठप हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार यदि 3 स्लैब डालकर पुल पूरा कर दिया जाए, तो न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी राहत मिलेगी। ग्रामीणों का आरोप है कि फंड की कमी का हवाला देकर जिम्मेदार विभाग सालों से मामले को टाल रहा है। एक नजर में प्रोजेक्ट पुल बनने से लोगों की आवाजाही होगी आसान
यह प्रस्तावित पुल सिर्फ लालमाटी-भनेतरा तक ही नहीं, बल्कि हसौद, चंद्रपुर, शिवरीनारायण, जांजगीर और बिलासपुर तक पहुंच का मुख्य मार्ग है। इसके बन जाने से बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और क्षेत्र की बड़ी आबादी को लाभ मिलता। इसके साथ ही संबंधित तहसील, बिलासपुर और जांजगीर तक अधिक गाड़ियों का आवागमन संभव हो जाता। औद्योगिक और व्यावसायिक दृष्टि से भी इस पुल को बेहद महत्वपूर्ण माना गया था। पुल के अधूरे होने से न केवल ग्रामीणों को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। टेंडर व अन्य प्रक्रिया के बाद ही काम शुरू होगा
स्लैब डालने व अन्य काम बाकी हैं, जिसे पूरा करवाने प्रयास किए जा रहे है। निर्माण कार्य का मूल्यांकन किया जाएगा। बचे हुए काम को करवाने फंड की मांग की जाएगी।
एनआर भगत, एसडीओ, सेतु विभाग जांजगीर-चांपा

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