अनूपपुर जिले में गहराते जल संकट और नदियों की कम होती जलधारा को देखते हुए कलेक्टर हर्षल पंचोली ने मंगलवार को पूरे जिले को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया है। यह निर्णय आगामी ग्रीष्म ऋतु में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। प्रशासन ने मध्य प्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 की धाराओं के तहत कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। चारों तहसीलों में स्थिति चिंताजनक कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के मुताबिक जिले की चारों तहसीलों अनूपपुर, कोतमा, जैतहरी और पुष्पराजगढ़ में कुओं और नलकूपों का जलस्तर अत्यधिक नीचे चला गया है। पेयजल और निस्तार की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने के लिए नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाना अनिवार्य हो गया है। अब बिना प्रशासनिक अनुमति के निजी नलकूप खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सिंचाई और औद्योगिक उपयोग पर पाबंदी आदेश के तहत किसी भी नदी, जलाशय या जलधारा से सिंचाई या औद्योगिक कार्यों के लिए पानी लेने पर रोक लगा दी गई है। पेयजल स्रोतों से सिंचाई करना अब अपराध की श्रेणी में आएगा। नदी-नालों पर संचालित उद्वहन योजनाओं के लिए भी अब ग्राम पंचायत और जल संसाधन विभाग की कड़ी अनुशंसा अनिवार्य होगी। जिन नदी-नालों में प्रवाह रुक गया है, वहां ठहरे हुए पानी के उपयोग की अनुमति भी नहीं दी जाएगी। 31 जुलाई तक रहेगा प्रतिबंध यदि किसी को विशेष परिस्थिति में नवीन बोरिंग खनन या सफाई करानी है, तो उसे संबंधित SDM को आवेदन देना होगा। एसडीएम की लिखित अनुमति के बाद ही यह कार्य किया जा सकेगा। प्रशासन का यह आदेश 31 जुलाई तक पूरे जिले में प्रभावी रहेगा। नियम तोड़ने पर 2 साल की सजा जिला प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसे 2 वर्ष तक का कारावास या 2000 रुपये तक का जुर्माना, अथवा दोनों दंड भुगतने पड़ सकते हैं।


