अपनी ढपली अपना राग के राह पर अनूपपुर जिला कांग्रेस कमेटी कांग्रेस में बढ़ती गुटबाजी से कार्यकर्ताओं में निराशा- संतोष कुमार झा 

अपनी ढपली अपना राग के राह पर अनूपपुर जिला कांग्रेस कमेटी
कांग्रेस में बढ़ती गुटबाजी से कार्यकर्ताओं में निराशा- संतोष कुमार झा 

अनूपपुर – कांग्रेस में बढ़ती गुटबाजी और नेताओं की उदासीनता को देखकर यह समझना बहुत आसान है कि कैसे कांग्रेस पार्टी राजनैतिक मजबूती के साथ सरकार को चुनौती दे पाएगी ? एक ओर भाजपा अच्छा माइक्रो मैनेजमेंट कर रही हैं। लेकिन इसके उलट बड़े मुद्दे नहीं उठा पाने के कारण पिछले वर्षो में कांग्रेस का ग्राफ नीचे की ओर जा रहा था। इसका सबसे बड़ा कारण जिले स्तर पर सर्वमान्य नेता का नहीं होना है और जो छोटे-छोटे नेता हैं उनको बड़ा बनाने के लिए पार्टी ने कुछ नहीं किया। कुल मिलाकर कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओ की अनदेखी है। कांग्रेस को स्थानीय मुद्दों को समझना और उसे उछालना होगा। यह तभी होगा जब जमीनी स्तर का नेता भी तैयार होगा।
पार्टी में बढ़ती गुटबाजी
पिछले दिनों मध्यप्रदेश सरकार के 1 वर्ष पूरे होने पर जिला कांग्रेस कमेटी के महा सचिव पुष्पराजगढ़ विधायक फुन्देलाल सिंह के नेतृत्व में प्रेस वार्ता कर विधानसभा का घेराव और किसानो के समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की बात की गई थी। इस मौके पर कोतमा पूर्व विधायक नही दिखे। इसके बाद बाबा अंबेडकर के विरूद्ध केन्द्रीय मंत्री अमितषाह के द्वारा संसद में दिए उपहास पूर्ण एवं अपमान जनक बयान के खिलाफ विषाल आमसभा एवं गृह मंत्री का पुतला दहन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष रमेश सिंह पूर्व विधायक सुनील सराफ और मनोज अग्रवाल कोतमा, अनूपपुर के कांग्रेस के पदाधिकारी, ब्लाक, मंडलम और सेक्टर अध्यक्ष के अलावा कई प्रकोष्ठो के पदाधिकारियों की अनुपस्थिति थे। बताया जाता है कि इन पदाधिकारियों ने दूसरे गुट के कांग्रेस नेता द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम से दूरी बनाई रखी। जिले में ऐसे कई राजनैतिक कार्यक्रम आयोजित हुए जिसमें एक गुट के नेताओं को देखा गया दूसरे गुट के नेता नदारत थे।
जिला कांग्रेसियो को किया अनदेखा
पिछले कुछ घटनाक्रमों को देखा जाए तो यह कहना गलत नहीं है कि जनता के बीच कांग्रेस अपनी पैंठ बना पाने में बिल्कुल असफल रही है यह भी सच हैं कि बिसाहूलाल सिंह के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने से पूर्व कांग्रेस पार्टी उनके मुट्ठी में ही रही और भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस पार्टी को अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से भी संचालित करते रहे। मध्य प्रदेश में इसी बीच में होने वाले उपचुनाव की घोषणा कर दी गई। प्रदेश नेतृत्व को अनूपपुर जिले के वरिष्ठ कांग्रेसियों द्वारा लगातार यह खबर दी जाती रही कि बिसाहूलाल अभी भी कांग्रेस को प्रभावित कर रहे हैं इसके समर्थन में एक वरिष्ठ कांग्रेसी ने तो हस्ताक्षर अभियान चलाकर प्रदेश नेतृत्व को बिसाहूलाल की कांग्रेस पार्टी में दखलअंदाजी से अवगत कराया। इस बात को प्रदेश नेतृत्व द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। परिणाम स्वरूप कांग्रेस के उम्मीदवार विश्वनाथ सिंह उपचुनाव में भारी मतों से हार गए।
विधायक और अध्यक्ष अपने ही क्षेत्रो तक सीमित
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का मानना है कि अनूपपुर जिला के तीन विधानसभा क्षेत्रो में से कोतमा विधान सभा और वहाँ के पूर्व विधायक सुनील सराफ अपने अनोखे अंदाज के लिए सबसे अधिक चर्चित रहे। रमेश सिंह को ज्यो ही अनुपपुर जिला का अध्यक्ष नियुक्त किया गया पूर्व अध्यक्ष फुन्देलाल सिंह ने अपना कार्य क्षेत्र पुष्पराजगढ़ तक ही समेट लिया। विधानसभा में हार के बाद स्वयं घोषित नेता जिले में स्थित एक विधानसभा के तत्कालीन विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में प्रभुत्व की जंग छिड़ गई। सब ने अपने-अपने खुद के कांग्रेस पार्टी का निर्माण कर लिया। हम सब रमेश, मैं भी रमेश, के नारो ने सुर्खियां तो खूब बटोरी पर वरिष्ठ कांग्रेसियों का दिल ना जीत सके और ना ही पार्टी को संगठित रख पाने में सफल हुआ। विधानसभा चुनाव में रमेश सिंह का हार जाना कांग्रेस पार्टी में घोर निराशा पैदा कर गया अनेक कांग्रेसी कार्यकर्ता कांग्रेस छोड़ कर चले गए। अब अनुपपुर कांग्रेस टुकड़ों में बट चुकी है हर एक नेता अपनी ढपली अपनी अपनी राग के मार्ग पर चल रहा है प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशों को अनदेखा किया जा रहा है कभी-कभी तो बड़े नेताओं को आने की सूचना कार्यकर्ताओं को नहीं दी जाती है।
कांग्रेस की कांग्रेस से ही लड़ाई
कोतमा विधानसभा के चुनाव के दौरान कांग्रेस के कुछ नेताओं ने जी 23 बनाकर कांग्रेस प्रत्यशी का ही विरोध किया था। पिछले 24 दिसंबर को अमित शाह के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन में अध्यक्ष कोतमा के पूर्व विधायक और कई कार्यकर्ता भी अनुपस्थित थे। अध्यक्ष से पूछने बताया कि उन्हें इस कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं थी। वरिष्ठ कांग्रेसी मानते हैं कि आज की परिस्थितयों में जब नेताओ में वर्चस्व की लड़ाई जोरों पर है गुटबाजी चरम पर है कांग्रेस पार्टी को जिले में पुनर्जीवित करने के लिए पुरानी कमेटी को भंग कर नए सिरे से समर्पित कार्यकर्ता और ऊर्जावान नेताओं के हाथ में जिला कांग्रेस कमेटी की जिम्मेदारी दी जाए, जिसमें गुटबाजी समापत हो और कांग्रेस पार्टी में नई जान फूँकी जा सके। 

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