अपनी नर्सरी में धतूरे का पौधा उगाता था जेफ्री एपस्टीन:नशे में इस्तेमाल होता है, भगवान शिव से जुड़ा है इसका फूल

हाल ही में जारी हुए एपस्टीन फाइल्स के ईमेल्स में यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की जहरीले पौधों में दिलचस्पी को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इन ईमेल्स में खास तौर पर ‘ट्रम्पेट प्लांट्स’ (धतुरा का पौधा) का जिक्र है। ईमेल्स में ऐसे लेख फॉरवर्ड किए गए थे, जिनमें कोलंबिया में इसके इस्तेमाल का जिक्र था। बताया गया कि इसके असर में व्यक्ति को कहीं भी ‘ले जाया’ जा सकता है, क्योंकि वह पूरी तरह आज्ञाकारी और भ्रमित हो जाता है। हिंदू परंपरा में धतूरा भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, समुद्र मंथन के दौरान जब विष निकला, तो शिव ने संसार की रक्षा के लिए उसे पी लिया। शिव मंदिरों में धतूरा के फूल और फल चढ़ाए जाते हैं। एपस्टीन फाइल्स में ‘जॉम्बी फ्लावर’ क्या है? ईमेल्स में जिस “जॉम्बी फ्लावर” का जिक्र है, वह दरअसल ट्रम्पेट आकार वाले पौधे हैं। 2015 में फॉरवर्ड किए गए एक मैसेज का शीर्षक था- “स्कोपोलामीन: कोलंबिया के जंगलों में उगने वाली एक शक्तिशाली दवा, जो इंसान की चेतना को खत्म कर देती है।” ईमेल के स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि उसके फाइनेंसर ने ऐसे पौधों में रुचि दिखाई थी। धतुरा के पौधों से स्कोपोलामीन नाम का एक रसायन निकलता है, जो दिमाग पर गहरा असर डालता है। स्कोपोलामीन याददाश्त कमजोर कर सकता है, व्यक्ति को भ्रम की स्थिति में डाल सकता है। इसी वजह से कुछ विशेषज्ञ इसे ‘जॉम्बी ब्रीथ’ भी कहते हैं। हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है धतूरे का फूल हिंदू परंपरा में बिगुल जैसे आकार वाला धतूरा फूल पवित्र माना जाता है। यह भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने पिया था, जिससे सृष्टि की रक्षा हुई। धतूरा उसी विष से जुड़ा प्रतीक माना जाता है। भारत में कई मंदिरों में, खासकर महाशिवरात्रि के समय, धतूरा के फूल और फल चढ़ाए जाते हैं। हालांकि यह पौधा जहरीला होता है, फिर भी इसे आध्यात्मिक शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। हालांकि इस धार्मिक महत्व का एपस्टीन फाइल्स में बताए गए संदर्भ से कोई सीधा संबंध नहीं है।

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