अपने विकारों और अहंकार की बलि देनी चाहिए: पं शास्त्री

भास्कर न्यूज| भखारा रीवागहन में श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा का आयोजन किया गया। पं आचार्य झम्मन प्रसाद शास्त्री ने कहा कि देवी भागवत के किसी भी श्लोक में बलि प्रथा का उल्लेख नहीं है। मां जगदंबा सभी जीवों पर करुणा बरसाती है। वह किसी भी जीव हत्या से प्रसन्न नहीं हो सकती। बलि देनी है तो अपने विकारों, अधिकारों और अहंकार की देनी चाहिए। सात्विक भाव से देवी की पूजा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ परंपरा के अनुसार पूजन विधान अपनाना चाहिए। पशु बलि निषेध के लिए जन जागरण जरूरी है। पूजा में भारतीय परिधान ही पहनना चाहिए। इससे सहजता बनी रहती है और देश की पहचान भी होती है। भारतीय वेशभूषा में जमीन पर लंबे समय तक बैठा जा सकता है। नवरात्र पर्व का वैज्ञानिक कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि ऋतु परिवर्तन के संक्रमण काल में व्यक्ति स्वस्थ रहे, इसलिए ऋषियों ने इसे विज्ञान माना। नवरात्रि के चार पर्व होते हैं। आश्विन और चैत्र प्रचलन में हैं। आषाढ़ शुक्ल और माघ शुक्ल पक्ष में भी ऋतु परिवर्तन शुरू होता है। इस समय लोग बीमार न पड़ें, इसलिए व्रत और संयम के साथ आराधना करनी चाहिए। मां भगवती की आराधना जसगीत, व्रत से करे: उन्होंने कहा कि नवरात्र में आराधना, उपासना, सत्संग और यज्ञ होना चाहिए। मां दुर्गा की स्थापना पंडालों में हो रही है, लेकिन डीजे के नाच-गानों से माहौल विकृत हो रहा है। मां भगवती की आराधना जस गीत, भजन, कीर्तन, ज्योत-जंवारा, देवी भागवत पाठ, दुर्गा सप्तशती पाठ, नवार्ण मंत्र जाप और व्रत से करनी चाहिए। इससे मां भगवती प्रसन्न होती है। कथा के अंत में महाआरती की गई। उन्होंने कहा कि मां भगवती महामाया की उपासना से आत्मबल और शक्ति मिलती है। देवी शक्ति से तमोगुण का नाश होता है। भगवान राम और कृष्ण ने भी शक्ति की उपासना कर विजय प्राप्त की। दशहरा पर रावण का दहन हर साल होता है, लेकिन हमारे भीतर का रावण जीवित रहता है। जब तक हम अपने भीतर के 10 दुर्गुणों का नाश नहीं करेंगे, तब तक असली विजयादशमी नहीं होगी। भगवान राम ने रावण पर विजय के लिए शक्ति की उपासना की थी। धमतरी। कथा सुनाते पं शास्त्री व उपस्थित श्रद्धालु।

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