जालंधर| ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अपरा, अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार ये 23 मई को पड़ रही है। विद्वानों ने अनुसार, अपरा एकादशी व्रत शुक्रवार को करना उत्तम है। दरअसल जिस तिथि में सूर्योदय माना जाता है, उस तिथि में ही व्रत करना उत्तम है। अपरा एकादशी का व्रत और पूजन करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। साथ ही मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर बस्ती पीरदाद के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि इस दिन लोग व्रत रखकर श्रद्धापूर्वक विष्णु भगवान की पूजा करते हैं। पूजा के समय अपरा एकादशी व्रत की कथा सुनते हैं और व्रत विधिपूर्वक रखने तथा किसी जरूरतमंद परिवार की सामर्थ्य के अनुसार, अन्न, धन से सहायता करने से अनेक प्रकार के ज्ञात अथवा अज्ञानता वश किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 मई को प्रात:काल 1 बजकर 13 मिनट से एकादशी तिथि समाप्त 23 मई को रात 10 बजकर 28 मिनट पर होगी।


