अपाचे और K-9 वज्र ने दुश्मन के ठिकानों को उड़ाया:बोफाेर्स ने बंकरों को उड़ाया; ध्रुव हेलिकॉप्टर ने हवा से दागे रॉकेट

जैसलमेर की पोकरण की फील्ड फायरिंग रेंज में मंगलवार को भारतीय सेना की दक्षिणी कमान की ओर से अग्नि वर्षा युद्धाभ्यास किया गया। इस युद्धाभ्यास में अपाचे और K-9 वज्र ने दुश्मन के ठिकानों को उड़ाया। वहीं बोफाेर्स ने दुश्मनों के बंकर को टारगेट किया। ध्रुव हेलिकॉप्टर ने भी आसमान से रॉकट दागते हुए दुश्मनों के टारगेट को निशाना बनया। दरअसल, इस युद्धाभ्यास को देखने के लिए दुनिया के 25 देशों के डिफेंस जर्नलिस्ट और एक्सपर्ट मौजूद थे। दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों को चिन्हित करने से लेकर उन्हें नष्ट करने तक की प्रक्रिया चंद सेकंडों में पूरी की गई। इसमें ‘सेंसर-टू-शूटर’ लिंक का बेहतरीन उदाहरण पेश किया गया, जहां टोही ड्रोन्स द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तत्काल स्ट्राइक की गई। आसमान से जमीन तक प्रहार इस युद्धाभ्यास की मुख्य आत्मा इसका ‘कंबाइंड आर्म्स’ दृष्टिकोण था। आधुनिक युद्ध अब केवल टैंकों या पैदल सेना तक सीमित नहीं हैं; यह सूचना, तकनीक और विभिन्न सैन्य अंगों के बीच सटीक तालमेल का खेल है। ‘अग्नि वर्षा’ में देखा गया कि कैसे जमीन पर रेंगते टैंक, आसमान में मंडराते ड्रोन और गोलाबारी करती तोपें एक ही ‘नेटवर्क-आधारित’ सिस्टम से जुड़ी थीं। दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों को चिन्हित करने से लेकर उन्हें नष्ट करने तक की प्रक्रिया चंद सेकंडों में पूरी की गई। इसमें ‘सेंसर-टू-शूटर’ लिंक का बेहतरीन उदाहरण पेश किया गया, जहां टोही ड्रोन्स द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तत्काल स्ट्राइक की गई। युद्धाभ्यास के हथियारों का प्रदर्शन और उनकी भूमिका ‘अग्नि वर्षा’ में शामिल हर हथियार ने अपनी विशिष्ट मारक क्षमता और युद्धक्षेत्र में अपनी महत्ता को सिद्ध किया। अभ्यास के दौरान इन हथियारों ने प्रमुख भूमिका निभाई।: थल सेना के ‘बाहुबली’: टैंक और इन्फैंट्री T-90 ‘भीष्म’ टैंक: भारतीय सेना के मुख्य युद्धक टैंक T-90 ने रेगिस्तानी टीलों के बीच अपनी रफ्तार का लोहा मनवाया। इसने अपनी लंबी दूरी की तोप से चलते हुए लक्ष्यों को सटीक रूप से भेदकर अपनी घातक गोलाबारी का प्रदर्शन किया। इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स (ICVs): इन वाहनों ने दुर्गम इलाकों में सैनिकों को तेजी से दुश्मन की सीमा के भीतर पहुँचाने और साथ ही अपनी मशीनी गन से कवर फायर देने की क्षमता दिखाई। आर्टिलरी (तोपखाना): लंबी दूरी की तबाही K-9 वज्र (K-9 Vajra): यह दक्षिण कोरियाई मूल की, लेकिन भारत में निर्मित ‘सेल्फ-प्रोपेल्ड’ होवित्जर है। इसने अपनी गतिशीलता दिखाई—यानी तेजी से पोजीशन बदलना और गोले दागकर वहां से हट जाना, जिससे दुश्मन जवाबी कार्रवाई न कर सके। बोफोर्स और सारंग तोपें: इन प्रणालियों ने अपनी पारंपरिक मजबूती और अचूक निशानेबाजी से दुश्मन के संचार केंद्रों और बंकरों को नेस्तनाबूद कर दिया। हवाई प्रहार: अपाचे और स्वदेशी ध्रुव अपाचे एएच-64ई (Apache AH-64E): दुनिया का सबसे घातक अटैक हेलीकॉप्टर कहे जाने वाले अपाचे ने अपनी ‘हेलफायर’ मिसाइलों और रॉकेटों से बख्तरबंद लक्ष्यों पर कहर बरपाया। इसकी नाइट-विज़न क्षमता और रडार सिस्टम ने यह साबित किया कि रात के अंधेरे में भी दुश्मन सुरक्षित नहीं है। एएलएच ध्रुव (WSI): स्वदेशी ‘एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर’ (ध्रुव) के वेपन सिस्टम इंटीग्रेटेड वर्जन ने भारतीय रक्षा उद्योग की ताकत दिखाई। इसने हवा से जमीन पर मार करने वाले रॉकेटों का उपयोग कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। ‘मेक इन इंडिया’ को 25 देशों के मीडिया ने देखा इस अभ्यास का एक बड़ा पहलू 25 देशों के अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की उपस्थिति थी। विदेशी मीडिया ने थार के इस दुर्गम इलाके में भारतीय सेना द्वारा हासिल की गई सटीकता और गति का बारीकी से अवलोकन किया। यह वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को एक ‘खरीदार’ से बदलकर एक ‘तकनीकी सैन्य शक्ति’ और संभावित ‘निर्यातक’ के रूप में स्थापित करने वाला कदम है। स्वदेशी हथियारों (जैसे ध्रुव और सारंग) का प्रदर्शन यह बताता है कि भारत अब अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं है। भविष्य का युद्धक्षेत्र: तकनीक और ड्रोन का जाल ‘अभ्यास अग्नि वर्षा’ केवल बारूद तक सीमित नहीं था। इसमें आधुनिक युद्ध के चार प्रमुख स्तंभों पर जोर दिया गया। अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS): निगरानी के लिए ड्रोन्स का व्यापक उपयोग। काउंटर-ड्रोन तकनीक: दुश्मन के ड्रोन्स को जाम करने या उन्हें मार गिराने वाले सिस्टम का परीक्षण। नेटवर्क सर्विलांस: हाई-टेक जाल के जरिए युद्धक्षेत्र की हर हलचल को कमांड सेंटर तक लाइव पहुंचाना। प्रेसिजन स्ट्राइक: कम से कम गोला-बारूद खर्च कर अधिकतम नुकसान पहुँचाने की रणनीति। राष्ट्रीय सुरक्षा का भरोसा दक्षिणी कमान का यह अभ्यास भारतीय सेना के ‘टेक्नोलॉजी इन्फ्यूजन’ (तकनीक का समावेश) के संकल्प को दोहराता है। पोकरण की रेतीली जमीन पर बरसी यह ‘अग्नि’ न केवल दुश्मन के लिए चेतावनी है, बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए इस बात का आश्वासन है कि उनकी सेना हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार और सक्षम है।

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