अब घर कैसे चलाएं:दिवाली गुजर गई, होली में भी नहीं आया वेतन, मितानिन कार्यक्रम की कार्यकर्ताओं ने एनएचएम एमडी को दफ्तर में घेरा

दिवाली-दशहरा गुजर गया। होली आ गई। पांच माह से लगातार आपके दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। वेतन नहीं मिला। बस लेटर ही जारी किया जा रहा है। क्या आपका लेटर बच्चों को दिखाकर उनके पेट भरें। अब त्योहार छोड़कर हम यहां बैठे हैं। अब वेतन का आदेश जारी होगा तब घर जाएंगे। सोमवार को स्वास्थ्य भवन में नेशनल हेल्थ मिशन के एमडी दफ्तर को घेरकर बैठी महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने एमडी रणबीर शर्मा को जब खरी-खरी सुनाई तो वे लाजवाब हो गए। दोपहर को तल्ख लहजे में जब तक चिल्लाना है चिल्लाओ कहकर अपनी दफ्तर में बैठने वाले एमडी के तेवर शाम को ढीले पड़े। उन्होंने मंगलवार को वेतन जारी करने का नया आदेश जारी किया। हालांकि सुबह 11 बजे एनएचएम एमडी ने एक और आदेश जारी किया लेकिन उसमें टाइम लिमिट नहीं थी। इसी से मितानिन कार्यक्रम का संचालन करने वाली विकासखण्ड समन्वयक, मितानिन हेल्पडेस्क फैसिलिटेटर, स्वस्थ्य पंचायत समन्वयक, एरिया कोर्डिनेटर एवं मितानिन प्रशिक्षक (शहरी) का गुस्सा भड़क गया। बस्तर, सरगुजा, गरियाबंद, महासमुंद, दंतेवाड़ा और कवर्धा सहित राज्य के सभी जिलों से कार्यक्रम कोर्डिनेटर सुबह ही नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन पहुंच गए थे। एनएचएम के 17 हजार स्वास्थ्य कर्मियों को भी नहीं मिला 3-3 माह से वेतन नहीं मिला है। रायपुर जिले के कार्यालय प्रभारियों का वेतन ऐन त्योहार के समय अटक गया है। जवाब नहीं दे सके, कहा- मैं एक माह पहले ही यहां आया हूं सुबह 11 बजे से ही मितानिन कार्यक्रम में शामिल महिलाएं अपना बोरिया-बिस्तर लेकर नवा रायपुर पहुंच गईं। उन्होंने सीधे एमडी दफ्तर के गेट के सामने धरना दिया। दोपहर होते होते स्वास्थ्य भवन का पूरा गलियारा प्रदर्शनकारियों से भर गया। प्रदशर्नकारियों ने एक भी स्टाफ को उनके कक्ष में घुसने नहीं दिया। उनकी नारेबाजी सुनकर एमडी ने पुलिस बुलवा ली। एमडी दोपहर करीब 1 से 1.30 बजे के बीच अपने कक्ष से बाहर आए बात नहीं बनी तो उन्होंने ये कह दिया कि जितना चिल्लाना चिल्लाओ, फिर वे अपने कक्ष में चले गए। उसके बाद प्रदर्शनकारी और भड़क गए। उनके तेवर देखकर वे 4.30 बजे फिर आए। इस बार प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ की अध्यक्ष सरोज सेंगर और प्रवक्ता सपना चौबे ने उन्हें बताया 5 माह से उन्हें नोडल अफसर डा. अजय कन्नौजे बहिनी-दीदी कहकर बस आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन वेतन जारी नहीं कर रहे हैं। एमडी ने फिर उन्हें तकनीकी कारण गिनाया तो उन्होंने साफ कह दिया अभी आदेश जारी होगा, तभी जाएंगे नहीं तो यहीं रहेंगे। अंत में एमडी ने कह दिया मैं तो एक माह पहले ही आया हूं, मुझे ज्यादा तकनीकी जानकारी नहीं है। क्यों अटका है वेतन: राज्य में मितानिन कार्यक्रम का संचालन पहले एक सामाजिक संस्था कर रही थी। करीब डेढ़ साल पहले उसका ठेका निरस्त किया गया। उसके बाद एनएचएम ने संचालन अपने हाथ में दिया। अक्टूबर में फिर सामाजिक संस्था को पूरा कार्यक्रम सौंप दिया गया। हैरानी की बात है कि 75 हजार से ज्यादा मितानिनों के वेतन का भुगतान एनएचएम के माध्यम से हर जिले के सीएमओ कर रहे हैं लेकिन करीब 700 मॉनीटरिंग करने वाले स्टाफ की सैलेरी सामाजिक संस्था को सौंप दी गई है।

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