जोधपुर शहर से लेकर गांवों में इन दिनों फाल्गुन मास के साथ ही चंग पर गीतों की आवाज गूंजने लगी है। खास बात ये है कि चंग का क्रेज आज भी लोगों में हैं। इसी के चलते शहर के कारीगर इन दिनों चंग बनाने के काम में जुटे हैं। शहर में क़रीब 10 परिवार है जो चंग बनाने का काम कर रहे हैं। बदलते समय के साथ भले ही चंग की जगह आधुनिक चीजों ने ले ली हो लेकिन आज भी गाँवों में इसकी अच्छी ख़ासी डिमांड है । इस बार चंग के साथ ही मजीरे, ओर झांझ बजने वाली चंग भी तैयार की गई है। ख़ास बात ये है कि जोधपुर में बनने वाले इन चंग की गुजरात के कई शहरों में भी सप्लाई की जाती है ।
चंग बनाने वाले जितेंद्र चौहान ने बताया उनका परिवार क़रीब 40 वर्षों से इस काम को करता आया है। जोधपुर में चंग की करीब 15 दुकानें हैं। यहां इस सीजन में करीब 4 हजार से 5 हजार के बीच चंग की बिक्री होती है। इस बार चंग के साथ ही मजीरे की आवाज आए इसके लिए भी खास चंग तैयार की है। ये चंग 900 रुपए से लेकर 2500 रुपए तक की है। समय के साथ आया बदलाव हालांकि बदलते दौर में पहले और अब के समय में काफ़ी बदलाव आ चुका है , लेकिन आज भी चंग की अच्छी ख़ासी डिमांड है। होली को लेकर गाँव के साथ ही शहर के युवा चंग ख़रीदने आ रहे हैं। बता दें कि चंग को होली के अवसर फाग गीतों के साथ बजाया जाता है। फाल्गुन मास की शुरुआत के साथ ही फाग गीतों की टोलियाँ फाग गीतों पर प्रस्तुति देती है। खासतौर पर गांवों में चंग का काफी क्रेज है।


