छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में कई ऐसे गांव हैं, जो पहाड़ो व घने जंगल के बीच बसा हुआ है। उन गांव तक कई दफे मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं तत्कल में नहीं मिल पाती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ड्रोन डिलीवरी नेटवर्क की शुरूआत की जा रही है। जिसमें ड्रोन की मदद से अब पहाड़ों में रहने वाले विशेष जनजाति व ग्रामीणों तक दवाईंया आसानी से पहुंच सकेगी। हेल्थ केयर ड्रोन डिलीवरी नेटवर्क का रायगढ़ में 13 दिसबंर को ट्रायल भी किया गया। जिसमें यह ट्रायल सफल रहा। बताया जा रहा है कि इस ड्रोन का दायरा तकरीबन 50 किमी तक होगा। यह उन जगहों पर काम करेगा, जहां एंबुलेंस व स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचने में काफी देर हो जाती है। जिले के धरमजयगढ़, कापू, तमनार, लैलूंगा समेत कई ऐसे में ब्लाॅक हैं। जहां विशेष जनजाति के लोग रहते हैं और उन्होंने अपना आशियाना पहाड़ो व घने जंगल के बीच बना रखा है, लेकिन वहां तक पहुंचने में काफी समस्याएं होती है। जब ऐसे गांव में किसी को आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत होगी, तो स्वास्थ्यकर्मी तो पहुंचेंगे, लेकिन तत्काल चिकित्सा सुविधा मुहैय्या कराने के लिए ड्रोन से दवाईंया व ब्लड सैंपल भी भेजा जा सकेगा। ट्रायल में तमनार तक भेजी गई दवाईंया
हेल्थ केयर ड्रोन डिलीवरी नेटवर्क के ट्रायल में रायगढ़ से तमनार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक ड्रोन के जरिए दवाइयां भेजी गईं। वहां से ब्लड सैंपल को कलेक्ट कर वापस रायगढ़ लाया गया। यह प्रक्रिया करीब 25-30 मिनट में पूरी हो गई। जबकि सड़क रास्ते से जाने पर रायगढ़ से तमनार पहुंचने में करीब 1 घंटे का समय लग जाता है। इस तकनीक से ब्लड सैंपल भेजने के बाद उनकी रिपोर्ट 1-2 घंटे के भीतर ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकती है। 1 किलो तक उठा सकेगा वजन
बायो मेडिकल इंजिनियर नितिराज सिंह ने बताया कि यह ड्रोन में 1 किलो तक का वजन उठा सकेगा। इसमें दवाईंया या ब्लड सैंपल जहां भेजना है, उसे मेप के द्वारा सेट कर दिया जाता है और उसके बाद यह सुरक्षित तरीके से वहां तक पहुंच जाता है। इसमें सेंडर व रिसीव का ऑप्शन रहता है। इमरजेंसी में ली जाएगी ड्रोन की सुविधा
सीएमएचओ डाॅ बिरेन्द्र कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि ड्रोन का प्रयोग सिर्फ इमरजेंसी के लिए किया जाएगा। इनका दायरा करीब 40-50 किमी का होगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों से 25-30 किमी तक कोई ब्लड सैंपल व दवाईंयो की सुविधा नहीं है। जहां पर एंबुलेंस व चिकित्सकिय सुविधा तुंरत नहीं पहुंच पाती है। वहां पर ड्रोन की सेवाएं ली जाएगी। उन्होंने बताया कि पहाड़ के उपर भेजा जाएगा। इस तकनीक से किसी गंभीर मरीज का ब्लड सैंपल लेकर 15 मिनट के अदंर उन्हें मेडिकल सुविधा दी जा सकती है। हेल्थ केयर ड्रोन डिलीवरी नेटवर्क का परीक्षण भी सफल रहा है।


