भास्कर न्यूज | सुकमा धान संग्रहण केंद्र व जिले के 25 उर्पाजन केंद्रों में आज पर्यंत पूरी तरह से धान का उठाव नहीं हो पाया है, जिसके चलते किसानों से समर्थन मूल्य में खरीदा गया करोड़ों का धान खुले आसमान के नीचे में पड़ा है। जिला मुख्यालय स्थित संग्रहण केंद्र में 248571 क्विंटल धान तिरपाल के भरोसे है, जिसकी कीमत करीब 57 करोड़ है। बीते एक सप्ताह से जिला मुख्यालय समेत आस-पास के इलाकों में शाम होते ही काले बादल छाने लगे हैं। वहीं शनिवार और रविवार को अंधड़ के साथ हुई तेज बारिश से संग्रहण केंद्र में खुले में रखा धान भीग गया। संग्रहण केंद्र में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं है, कैप कवर के भरोसे करोड़ों का धान रखा गया है। बारिश की वजह से अब संग्रहण केंद्र में रखा धान अंकुरित होने लगा है। संग्रहण केंद्र के प्रभारी का कहना है कि नवंबर व दिसंबर माह में खरीदे गए धान में ही अंकुरण हो रहा है। कैप कवर के ढकने से नमी व उमस से धान अंकुरित होकर जरई व पौधे के रूप में तब्दील होने लगे हैं। सुकमा में ढाई लाख क्विंटल धान होने लगा खराब: बीती रात सुकमा में हुई बारिश के बाद भास्कर ने धान संग्रहण व खरीदी केंद्रों का जायजा लिया। इस दौरान केंद्रों में अव्यवस्था साफ दिखने लगी। बारिश से न सिर्फ धान भीगा, बल्कि धान खराब भी हो रहा है। किसानों के खून पसीने की मेहनत से उत्पन्न धान की खरीदी छत्तीसगढ़ में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक की गई थी। इसके लिए सुकमा जिले में 25 उपार्जन केंद्र बनाए गए, जिसमें किसानों ने अपना धान बेचा। इन समितियों से धान का उठाव 72 घंटे के भीतर होना था, लेकिन धान खरीदी के ढाई महीने बीतने के बाद भी अब तक धान का उठाव नहीं हो पाया है। इसके चलते धान खरीदी केंद्रोंमेंधानजाम है। संग्रहण केंद्र प्रभारी दीपेंद्र दीपेन्द्र ठाकुर ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुसार धान का उठाव हो रहा है। शासन का निर्देश था कि सबसे पहले उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव होगा, इसके बाद संग्रहण केंद्र का। बारिश के बाद धान तुरंत अंकुरित नहीं होता। दिसंबर में खरीदे गए धान को ढका गया था। ओस के कारण जो भांप बनती है, उसके कारण धान अंकुरित होने लगे हैं।


