भास्कर न्यूज | जालंधर नगर निगम रोजाना केवल दो दर्जन आवारा कुत्तों की ही नलबंदी व नसबंदी करता है। ये स्पीड बहुत कम है। मंगलवार को डीसी दफतर में मीटिंग के दौरान जालंधर के डीसी डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने अफसरों को आदेश दिए कि वार्ड लेवल पर स्टरलाइजेशन प्रोग्राम को आरंभ किया जाए। जालंधर में 85 वार्ड हैं। जबकि सर्जरी की सुविधा केवल एक जगह है। ये भी जरूरत की तुलना में छोटी है। पशुओं के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए जिला पशु क्रूरता निवारण सोसायटी की बैठक बुलाई गई थी। इसमें 2 मुद्दों पर बात हुई है। पहली- सड़कों पर किसानों की तरफ से छोड़े जा रहे पशुओं के विषय में और दूसरी नगर निगम की सीमा के अंदर खतरा बने आवारा कुत्तों की बढ़ती गिनती रोकने के लिए सर्जरी प्रोग्राम में तेजी लाने के बारे में। डीसी ने दोनों विषयों पर अब तक की योजनाओं की जानकारी ली है। मंगलवार को पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पशुपालक किसानों को जागरूक करें कि पशुओं को बेसहारा छोड़ने की बजाय उन्हें गौशालाओं में ले जाएं। वहां पर इन पशुओं की उचित देखभाल हो सकेगी। सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा। डीसी डॉ. अग्रवाल ने डेयरी विकास विभाग व मिल्कफेड को भी इस जागरूकता अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा है ताकि किसानों को इस बारे में जागरूक किया जा सके। उन्होंने कहा कि उक्त जिला स्तरीय कमेटी में पशुपालक किसानों को भी शामिल करना चाहिए। नगर निगम के एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम की समीक्षा भी की गई। नगर निगम के अधिकारियों को कुत्तों की नसबंदी के कार्य को वार्ड वार लागू करने को कहा और इस संबंध में नियमित रिपोर्ट भेजने के भी निर्देश दिए। उन्होंने बीमार व घायल पशुओं की देखभाल के लिए एंबुलेंस की खरीद के संबंध में भी जानकारी हासिल की। नगर निगम अधिकारियों ने उन्हें बताया कि नगर निगम के पास एक एंबुलेंस उपलब्ध है, जबकि दूसरी एंबुलेंस खरीदने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जा रही है। डिप्टी कमिश्नर ने आदमपुर नगर कौंसिल को निर्देश दिए कि वे सब-डिवीजन में डॉग पॉड बनाने के लिए उपयुक्त जगह की पहचान कर 15 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करें, जहां नसबंदी के बाद कुत्तों को निर्धारित दिनों तक रखा जाएगा। उन्होंने सभी नगर परिषदों और नगर निगम अधिकारियों को कहा कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र से काऊ सेस एकत्रित करके समय पर जमा करवाएं, ताकि इसे गौशालाओं में गौवंश की सेवा और बेहतरी के लिए खर्च किया जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि पंजाब सरकार द्वारा पेट्रोल पंप, मैरिज पैलेस, सीमेंट की दुकानों, वाहन बेचने वाली एजेंसियों और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों या सामान पर लगाया गया काऊ सेस पूरा वसूला जाए। इससे जो रेवेन्यू अर्जित होगा, वो गौशालाओं के संचालन पर खर्च होगा।


