झारखंड में बिजली उत्पादन की दरें अब नए और स्पष्ट नियमों के तहत निर्धारित की जाएंगी। झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग (विद्युत उत्पादन दर निर्धारण की शर्तें एवं नियमावली) विनियम-2025 अधिसूचित कर दिया है। ये नियम एक अप्रैल 2026 से लागू होंगे और 31 मार्च 2031 तक प्रभावी रहेंगे। आयोग के अनुसार, नए नियमों का उद्देश्य राज्य में बिजली उत्पादन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और उपभोक्ता हितैषी बनाना है। इसके तहत राज्य में स्थित थर्मल और जल विद्युत उत्पादन इकाइयों के लिए बिजली की दरें तय की जाएंगी, जिससे उत्पादन कंपनियों को लागत के अनुरूप उचित दर मिल सकेगी और अनावश्यक खर्च पर रोक लगेगी। नियमों के तहत बहु-वर्षीय टैरिफ प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें हर साल दर तय करने के बजाय पांच साल की अवधि के लिए पहले से ही टैरिफ निर्धारण कर दिया जाएगा। इससे बिजली उत्पादन कंपनियों को दीर्घकालीन योजना बनाने में सहूलियत होगी और राज्य में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही उपभोक्ताओं पर अचानक दर वृद्धि का बोझ नहीं पड़ेगा। ऊर्जा सचिव की नियुक्ति नहीं होने से 150 कर्मियों को 4 माह से वेतन नहीं झारखंड विद्युत कार्य विभाग कर्मचारी संघ ने विभाग में ऊर्जा सचिव का पदस्थापन नहीं होने के कारण कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है। संघ की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। संघ के अनुसार, अनुपूरक बजट में आवंटन होने के बावजूद ऊर्जा सचिव का पद खाली रहने से क्षेत्रीय कार्यालयों को राशि निर्गत नहीं हो पा रही है। इसके चलते विगत चार माह से विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन भुगतान पूरी तरह ठप है। इससे लगभग 150 कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि अविलंब ऊर्जा सचिव का पदस्थापन किया जाए, ताकि वेतन भुगतान हो सके।


