जयपुर नगर निगम क्षेत्र में संचालित अन्नपूर्णा रसोई में अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी (AI) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे इन रसोईयों में होने वाले फर्जीवाड़े को रोका जाएगा। इसके लिए जयपुर में जल्द ही एक रसोई में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। अगर ये सफल होता है तो जयपुर नगर निगम सीमा में चलने वाली तमाम रसोईयों में इसका उपयोग किया जाएगा। दरअसल अन्नपूर्णा रसोई में राज्य सरकार की तरफ से रियायती दरों पर आमजन को भोजन करवाने की सुविधा दी जाती है। यहां आमजन से 8 रुपए लिए जाते है, जिससे एक थाली भोजन की मिलता है, जबकि भोजन देने वाली एजेंसी को सरकार 22 रुपए का अतिरिक्त अनुदान देती है। अन्नपूर्णा रसोई में ऐसे करते है फर्जीवाड़ा
सरकार हर रसोईयों में हर रोज निर्धारित संख्या में खाने की थाली निर्धारित करती है। इसी की संख्या के हिसाब से अनुदान राशि देती है। शहरों में संचालित रसोईयों में सुबह-शाम के भोजन की 50-50 या कहीं-कहीं 100-100 थाली निर्धारित रहती है। रसोई संचालक अगर किसी दिन इन संख्या से कम लोग खाने के लिए आते है तो एक ही व्यक्ति के एक से अधिक बिल काट लेते है या किसी दूसरे परिचित के नाम की आईडी से बिल काटकर बिक्री दिखाते है। पिछले दिनों कुछ ऐसे भी मामले आए जिसमें एक ही व्यक्ति के नाम से जयपुर शहर में अलग-अलग रसोईयों में बिल जनरेट किए गए। ये बिल जनरेट करने का समय भी 2 से 5 मिनट या उससे थोड़ा ज्यादा समय के अंतराल में किए गए। ऐसे रूकेगा AI कैमरे से फर्जीवाड़ा वर्तमान में अन्नपूर्णा रसोईयों में जो सिस्टम में उसके तहत खाने के लिए आने वाले व्यक्ति का आधार कार्ड या कोई दूसरा आईडी कार्ड लेते है। इसका रसोई में फोटो खींचते है। इसे हाथों-हाथ पोर्टल पर चढ़ाते है और उसके बाद उसे खाने की थाली परोसते है। लेकिन ये देखने वाला कोई नहीं होता है कि व्यक्ति रसोई में सही में खाने के लिए आया है या नहीं? अगर व्यक्ति आया है तो क्या उसने खाना खाया है या नहीं? AI बेस कैमरे में अब रसोई में आने वाले हर व्यक्ति का हैडकाउंट होगा। इसके अलावा AI बेस कैमरे से रसोई में आने वाले हर व्यक्ति का फेस भी रीड किया जाएगा। इसके आधार पर ये पता चल सकेगा कि रसोई में वास्तविक संख्या में कितने लोगों ने प्रवेश किया। इनमें से कितने लोगों ने बिल कटवाकर खाना खाया।


