फेल्योर से सीख लेकर भविष्य में सफलता पाई जा सकती है। एक खिलाड़ी और पढ़ाई कॅरियर की शुरुआत काफी हद तक एक जैसी होती है। बहुत मेहनत और फोकस रहना खिलाड़ी और स्टूडेंट दोनों के लिए जरूरी होता है। कोटा के जवाहर नगर स्थित सत्यार्थ कैम्पस में स्टूडेंट्स के बीच पहुंचकर पद्मभूषण अभिनव बिंद्रा ने ये बात कही। उन्होंने अपना लक्ष्य निर्धारित करने, खेल और खिलाड़ियों का सम्मान के साथ कोच और खिलाड़ी के बीच के रिश्तों के बारे में समझाया। इसके बाद टैलेंटेक्स कार्यक्रम में पहुंचे। मैंने भी अपनी असफलताओं से सीख लेकर ही सफलता पाई बिंद्रा ने कहा कि आपका फेल्योर ही आपको सिखाता है। मैंने भी अपनी असफलताओं से सीख लेकर ही सफलता पाई है। मैं अपने फेल्योर से सीखकर ही ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत पाया। अभिनव बिंद्रा ने स्टूडेंट्स से कहा कि असली सफलता आपकी हैप्पीनेस है। हर काम करने में मन लगाओ। खेलते हो तो मन से खेले और रोज अपना बेस्ट देने की कोशिश करो। कम्पीटिशन मत देखो रोज अपना बेहतर काम करो, जब आपको अपने काम में खुशी मिलेगी तो वही सफलता की तरफ ले जाएगी। इमोशन को दबने मत दो स्टूडेंट्स के सवाल पर उन्होंने कहा कि इमोशन को दबने मत दो, क्योंकि वो रहेगा तो आपका बार-बार ध्यान भटकेगा। बातचीत करो, माता-पिता से, दोस्तों से और शेयर करो। इससे आप मस्त रहना सीखेंगे और तभी ध्यान लगाकर कोई काम करना सीखेंगे। रिश्ते बनाएं, अनुशासित रहें
खेल में कोच से रिलेशन पर भी आपकी सफलता निर्भर करती है। इसी तरह पढ़ाई और हर क्षेत्र में जो आपके कोच हैं, जो आपके दोस्त खिलाड़ी या आपके प्रतिस्पर्द्धी सभी से आपका व्यवहार होना चाहिए। अपने कोच की बात पर ध्यान देते हुए खुद को बेहतर बनाने के लिए अनुशासन में रहते हुए उन्हें फोलो करें। टैलेंटे के साथ हार्डवर्क जरूरी उन्होंने कहा कि टैलेंटे के साथ हार्डवर्क जरूरी है। पढ़ाई में कॅरियर बनाना अच्छी बात है। आप सभी कुछ सोचकर कोटा में पढ़ रहे हैं। किसी भी कॅरियर में जाएं लेकिन कोई न कोई स्पोर्ट्स से जरूर जुड़े रहें। क्योंकि स्पोर्ट्स जो सीखाता है वो शायद कहीं सीखने को नहीं मिलता। कुछ देर ही खेलें लेकिन जरूर खेलें। मेंटल स्ट्रेस को स्वीकार करने से परिणाम को लेकर आपकी चिंता बहुत कम हो जाएगी और परफॉर्मेंस बेहतर हो जाएगा। गोल्ड मेडलिस्ट बिंद्रा ने कहा कि अपने आप को बेहतर करने का सबसे अच्छा जरिया खुद को कंफर्ट जोन से बाहर निकालना होता है। हर हार से सीखें
मैं एथेंस ओलंपिक में बहुत खराब खेला, लेकिन जब अध्ययन किया तो पता चला कि जिस बेस पर मैं खडा था, वो हिल रहा था, इसलिए निशाने अच्छे नहीं लगे। हमें हर हार का एनालिसिस करना चाहिए ताकि खुद को बेहतर बना सकें। परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव ला सकें। खुद के प्रति ईमानदार रहें
बिंद्रा ने कहा, आपको खुद के प्रति बेहद ईमानदार रहना होगा और हर रोज सोने से पहले खुद को आईने में देखना होगा और खुद से पूछना होगा, क्या मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया ? यदि उत्तर हां है तो आप पाएंगे कि आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे और यदि ना है तो आपको खुद में सुधार करने की आवश्यक्ता है। ढाई करोड़ के कैश प्राइज दिए
कार्यक्रम में देशभर से मेधावी विद्यार्थी व उनके पेरेंट्स भी शामिल हुए। कार्यक्रम में कक्षा 5 से 10 वीं तक के टॉपर्स को सक्सेस पॉवर सेशन में नेशनल व स्टेट रैंक के साथ ही 2.50 करोड़ के कैश प्राइज दिए गए। टैलेंटेक्स में कुल 15 हजार 250 कैश प्राइज दिए गए। इस साल टैलेंटेक्स परीक्षा ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों मोड में आयोजित की गई थी। टैलेंटेक्स में कक्षा 8, 9 एवं 10 टॉपर्स को 1 लाख, कक्षा 5, 6 एवं 7 के टॉपर को 50 हजार रूपए का पुरस्कार दिया गया है।


