छत्तीसगढ़ सरकार ने जल संरक्षण को योजनाओं की सीमाओं से बाहर निकालकर जनआंदोलन का स्वरूप देने का स्पष्ट संकल्प दोहराया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जल संकट अब केवल पर्यावरण की नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और विकास से जुड़ी गंभीर चुनौती बन चुका है, जिसका समाधान जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में जल संचय–जन भागीदारी 2.0 अभियान की प्रगति और आगामी कार्ययोजना पर गहन मंथन हुआ। केंद्रीय मंत्री पाटिल इस बैठक में वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर के कलेक्टरों ने जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की विस्तृत प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में द्वितीय स्थान हासिल किया, जबकि कई जिलों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मान मिला। अभियान के दूसरे चरण अंतर्गत तकनीक आधारित और अधिक परिणाममूलक रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य सरकार ने 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर एक विशेष पहल के तहत 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को अपने खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस कार्य में जिला प्रशासन के साथ-साथ औद्योगिक समूहों का सहयोग भी लिया जा रहा है। इन डबरियों से भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ किसानों को सिंचाई एवं मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी। केंद्र की सराहना, मनरेगा पर जोर
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने छत्तीसगढ़ के प्रयासों और नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य का देश में दूसरा स्थान हासिल करना गौरव का विषय है। उन्होंने सभी कलेक्टरों को मनरेगा के तहत उपलब्ध राशि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, राजनांदगांव में एक महिला सरपंच द्वारा किए गए जल संचयन प्रयासों को प्रेरणादायी बताया। एक नजर में
प्रदेश में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल ब्लॉक {क्रिटिकल ब्लॉकों में 40% और क्रिटिकल में 65% जल संरक्षण का टारगेट {2024 की तुलना में 2025 में 5 ब्लॉकों में वाटर लेवल सुधर {10 लाख जल संरचनाओं से जल सुरक्षा की मजबूत नींव {युवाओं को जलमित्र बनाएंगे। … जल संचय-जन भागीदारी 2.0 क्या है?
यह जल संरक्षण का दूसरा चरण है, जिसमें पहले चरण के अनुभवों के आधार पर तकनीक आधारित और परिणाम केंद्रित मॉडल अपनाया गया है। इसमें बोरवेल रिचार्ज, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, ओपनवेल रिचार्ज, सोक पिट और रिचार्ज शाफ्ट, जैसी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। दूसरे चरण में सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट और जल सुरक्षा योजनाओं पर विशेष फोकस रहेगा। गांवों के युवाओं को जल मित्र के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि अभियान को जमीनी स्तर पर गति मिले। खेती से जुड़े जल संकट को देखते हुए सरकार ने चार लाख से अधिक किसानों को खेतों में डबरी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। डबरी से वर्षा जल का संग्रह, भू-जल रिचार्ज, सिंचाई सुविधा और मछली पालन से अतिरिक्त आय जैसे लाभ मिलते हैं जिससे जल संरक्षण किसानों के लिए आर्थिक रूप से उपयोगी बनता है।


