भारतीय संस्कृति में जूठन छोड़ना पाप माना गया है। दूसरी ओर शादियों, उत्सवों या त्योहारों में बड़े पैमाने पर भोजन की बर्बादी होती हैं। इन अवसरों पर ढेर सारा खाना कचरे में चला जाता है। होटलों में भी हम देखते हैं कि काफी मात्रा में भोजन जूठन के रूप में छोड़ा जाता है। इस भोजन की बर्बादी को देखते हुए सदैव सामाजिक बुराइयों पर अपनी आवाज उठाने वाला अभ्यास मंडल एक जन जागृति मुहिम चलाएगा, जिसके तहत कार्यक्रम स्थल, धर्मशाला, मैरिज गार्डन, होटल अन्य स्थानों पर भोजन जूठा नहीं छोड़ने के सदेश पत्र, बैनर प्रेषित करेगा। इसके साथ ही सामाजिक संगठनों से प्रत्यक्ष आग्रह करेगा कि वे अपने-अपने समाज में इसका प्रचार करें। इसकी शुरुआत नंदकिशोर उपाध्याय के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में की गई। इस अवसर पर भोजन का जूठा नहीं छोड़ने का संदेश देने वाले बैनर के विमोचन किया गया। अभियान की जानकारी देते हुए स्वप्निल व्यास ने बताया यू्एन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल 40 प्रतिशत खाने-पीने की चीजें बर्बाद हो जाती हैं। साथ ही देश में 1000 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का भोजन नष्ट हो जाता है, जबकि रोज देश में 19 करोड़ लोग भूखे सोते हैं। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए अभ्यास मंडल आगामी दिनों में इस के लिए गंभीरता से कार्य करेगा क्योंकि इंदौर में आए दिन बड़े पैमाने पर आयोजन होते हैं, जहां भोजन और डिस्पोजल को बड़े पैमाने पर बर्बाद किया जाता हैं। कार्यक्रम में अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता, शरद सोमपुरकर, नेताजी मोहिते, शफी शेख, मुरली खंडेलवाल, रोटरी क्लब, वैष्णव शिक्षण संस्थान से जुड़े भूतपूर्व छात्रों का मित्र समूह के सदस्य उपस्थित रहे।


