अमरकंटक के सुप्रसिद्ध बैद्यराज ठूनू सिंह मरकाम की विरासत को संभाल रहे हैं नाती लोक सिंह दादाजी का निर्देश एवं विश्वास ही हमारी पूंजी है

अमरकंटक के सुप्रसिद्ध बैद्यराज ठूनू सिंह मरकाम की विरासत को संभाल रहे हैं नाती लोक सिंह
दादाजी का निर्देश एवं विश्वास ही हमारी पूंजी है
अमरकंटक।
प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक के वार्ड क्रमांक 8 कपिला संगम से लगे दो पहाड़ियों के मध्य तलहटी पर कपिला नदी के उद्गम स्थल तट में पुराने वैद्यराज दादा ठूनू सिंह मरकाम अपने परिवार के साथ रहते रहे हैं जिनका मूल व्यवसाय कार्य प्रत्येक गंभीर रोगों का बीमार ग्रस्त लोगों का बहुत ही सस्ते में देसी जड़ी बूटी आयुर्वेदिक इलाज पूरे  तन्मयता के साथ के साथ करते रहे हैं उनकी बातों में दवा में इतनी ताकत होती रही की बीमार व्यक्ति ठीक हो जाता था उपचार करने आने वाले रोगी का उन पर अटूट विश्वास रहता रहा है। उनकी उनकी ख्याति बहुत दूर-दूर तक फैली हुई थी उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ अजीत जोगी तथा मध्य प्रदेश की तेज तर्रार महिला मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती तक का इलाज उन्होंने किया था यहां तक की उन्होंने कई बड़े  ओहदे पर बैठे  प्रशासनिक अधिकारियों का उनके बुलावे पर बंगले पर जाकर इलाज करते रहे हैं तथा समाधान करते रहे  वैद्यराज कई गंभीर असाध्य रोगों का इलाज भी करते रहे हैं इससे उनकी ख्याति बहुत फैली हुई थी उपचार करने के लिए बहुत दूर-दूर से उनका बुलावा आता था जाते भी थे। वह स्वयं भी एक गंभीर बीमारी से पीड़ित थे अपना स्वयं का इलाज भी जड़ी बूटी से किया था ठीक भी हो गए थे। उनका गत वर्ष मानसिक संतुलन ठीक ना होने के चलते 98 वर्ष की उम्र में असामयिक निधन हो गया था। उल्लेखनीय है कि सुप्रसिद्ध बैद्य दादा ठूनू सिंह मरकाम के न रहने के बाद उनकी विरासत को उनका नाती लोक सिंह मरकाम तथा नातिन बहू अब बखूबी संभाल रहे हैं दादा ठून्नू सिंह मरकाम के  अपने जीवन काल में ही अपने नाती लोक सिंह तथा नातिन बहू को जड़ी बूटी कहां मिलती है कैसे मिलती है उसका कैसे उपयोग करना है कैसे बनाया जाता है अपने पूरे अनुभव का लाभ उन्होंने समय रहते बता दिया था तथा सिखा दिया आज वही कार्य लोक सिंह उनकी बताई शिक्षा दीक्षा अनुभव का लाभ के तहत विरासत संभाल रहे हैं। लोक सिंह की पत्नी जड़ी बूटी का दवा कैसे बनाया जाता है किस विधि से बनाया जाता है वही पूरा करती है लेकिन दवाई रोग मर्ज कैसा है कितना पुराना है कितना समय लगा ठीक होने में उसी हिसाब से लोक सिंह संबंधित रोगी से पूछ कर बहुत ही काम कीमत पर दवा देने का काम करते है। अमरकंटक के पत्रकार धनंजय तिवारी ने उनसे मिलकर आवश्यक जानकारी मिली तथा पूछा कि कौन-कौन से रोग मर्ज की दवा देते हैं उन्होंने बताया कि टीवी शुगर बीपी किडनी लिवर चर्म रोग दंत रोग आंख का गुलबकावली अर्क कमजोरी की दवाई दी जाती है दवा वह स्वतः अपनी पत्नी के साथ कूट पीसकर बनाते हैं मशीन का उपयोग नहीं किया जाता। सुप्रसिद्ध वैद्य दादा ठूनू सिंह मरकाम की पत्नी जो वृद्ध हो गई है देख सुन लेती है लेकिन शारीरिक कमजोरी है अपने नाती एवं बहू का संरक्षण देखरेख करती है । हालांकि अमरकंटक में बहुत से लोग हैं जो जड़ी बूटी का व्यवसाय करते हैं और उनसे ही रोजी-रोटी चलती है । लोक सिंह मरकाम का कहना है कि बहुत सी दवाएं जड़ी बूटी यहां के जंगल में मिल जाती है जो नहीं मिलती उसे बाहर से लाकर विधि से बनाई जाती है । अन्य लोगों के के द्वारा जो हजारों रुपए दवा के लिए जाते हैं वह मात्र चार पांच सौ रू में ही दवा देते हैं करते हैं उन्होंने यह भी कहा कि जो लोगों का हम पर विश्वास है वह टूटने नहीं देंगे यह हमारे दादाजी का निर्देश था कहना था हम उसी को मानकर चल रहे  हैं। उन्हीं के नाम पर आज भी मरीज दूर-दूर से दवा लेने आते हैं हम उनका विश्वास कैसे टूटने दे सकते हैं। मरीज एवं उनके परिजन कभी भी किसी भी समय आ सकता है और हमारे यहां रह सकता है। हमारे दादा ठूनू सिंह पैसा नहीं कमाए नाम अवश्य कमाया है। थोड़ी बहुत खेती है धान हो जाता है गेहूं चना हो जाता है इससे हमारा गुजर बसर हो जाता है।

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