अमृतसर जिले में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आज ऐतिहासिक जलियांवाला बाग में राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। हालांकि, इस अवसर पर कार्यक्रम में सीमित उपस्थिति को लेकर सवाल उठे, जिसने अतीत की व्यापक जनभागीदारी की याद दिला दी। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उपायुक्त (डीसी) दलविंदरजीत सिंह सहित कुछ अधिकारी और स्टाफ सदस्य मौजूद रहे। सभी ने महात्मा गांधी और स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन भी रखा गया।
सीमित संख्या में रही लोगों की मौजूदगी इस श्रद्धांजलि सभा में सीमित संख्या में लोगों की मौजूदगी पर डॉक्टर राकेश शर्मा ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि इतने ऐतिहासिक और पवित्र दिन पर जलियांवाला बाग में पहले जैसी भागीदारी देखने को नहीं मिली। लोगों की कम संख्या को बताया चिंताजनक डॉ. शर्मा ने याद दिलाया कि कुछ समय पहले तक यहां इस दिन मेले जैसा माहौल होता था, जब जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और बड़ी संख्या में लोग शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचते थे।डॉ. राकेश शर्मा ने मौजूदा स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि आज डीसी सहित केवल कुछ प्रशासनिक अधिकारी और स्टाफ ही कार्यक्रम में नजर आए। जनभागीदारी पर दिया जोर इसे एक गलत परंपरा बताते हुए उन्होंने जोर दिया, “जो कौम अपने शहीदों को भूल जाती है, वह कभी आगे नहीं बढ़ सकती।” उनका मानना था कि नई पीढ़ी को शहीदों के बलिदान से जोड़ने के लिए ऐसे ऐतिहासिक स्थलों और अवसरों पर व्यापक जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से की अपील उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि भविष्य में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि और शहीदी दिवस जैसे अवसरों को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए। इसके बजाय, इसे जनआंदोलन का रूप दिया जाए, ताकि देश की आजादी की कीमत और शहीदों के त्याग को हमेशा याद रखा जा सके। लोगों ने दी श्रद्धांजलि इस कार्यक्रम में माला चावला और ए पी आर ओ योगेश शर्मा सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे। जलियांवाला बाग जैसे ऐतिहासिक स्थल पर आयोजित यह आयोजन एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने इतिहास और शहीदों के प्रति उतनी संवेदनशीलता रखते हैं, जितनी अपेक्षित है।


