अमृतसर में SGPC अंतरिम-कमेटी की बैठक:ज्ञानी रघुबीर सिंह को 72 घंटे का नोटिस; AI कंपनियों से संवाद का निर्णय

अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुख्य कार्यालय में अंतरिम कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा के बाद बड़े फैसले लिए गए। बैठक के दौरान गोल्डन टेंपल के हेड ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह को 72 घंटे के भीतर अपने आरोपों के समर्थन में लिखित सबूत पेश करने का नोटिस जारी किया गया है। SGPC का कहना है कि बीते कल बुधवार को पंजाब प्रेस क्लब, जालंधर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और यदि तय समय में जवाब नहीं मिला तो अगली कार्रवाई की जाएगी।। यह कार्रवाई जालंधर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद की गई। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी चुनौतियों को AI कंपनियों से संवाद करने और शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता सेमिनार आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है। अब पडिंये क्या कहा था हेड ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह ने जालंधर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ज्ञानी रघुबीर सिंह ने एसजीपीसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एसजीपीसी की जमीनों की बिक्री मनमर्जी से की जा रही है और इन सौदों में भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जमीन बिक्री में पारदर्शिता पर उठे सवाल उन्होंने कहा कि गुरु घर की संपत्ति की रक्षा करना एसजीपीसी की जिम्मेदारी है, लेकिन मौजूदा हालात चिंता पैदा करने वाले हैं। उनके मुताबिक जमीनों के सौदों में पारदर्शिता की कमी है और कई फैसले बिना व्यापक चर्चा के लिए जा रहे हैं। अकाल तख्त हुक्मनामे का हवाला, जत्थेदार हटाने पर सवाल ज्ञानी रघुबीर सिंह ने 2 दिसंबर 2024 को श्री अकाल तख्त साहिब से जारी हुक्मनामे का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस हुक्मनामे की पालना न करने के कारण ही जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को पद से हटाया गया और यह फैसला धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था। लंगर की सूखी रोटियों की बिक्री पर गड़बड़ी का आरोप इसके साथ ही उन्होंने लंगर की सूखी रोटियां बेचने के मामले में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि गुरु घर की सेवा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता अस्वीकार्य है। 328 स्वरूपों के गुम होने पर निष्पक्ष जांच की मांग उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों के गुम होने के मामले को भी अत्यंत गंभीर बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद एसजीपीसी की ओर से की गई कार्रवाई ने पंथक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

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