अमृत योजना के तहत 2016-17 में इंदिरा कॉलोनी–सुभाषपुरा में 24 घंटे पीने का पानी देने वाली योजना का पैसा पीएचईडी के अधिकारी डकार गए। हैरानी की बात यह है कि पानी तो पहुँचा नहीं, उल्टा विभागीय अधिकारियों के पास इसका एक कागज भी उपलब्ध नहीं है। सोमवार को भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने अधीक्षण अभियंता को इस प्रकरण की जांच कर पूरी रिपोर्ट देने को कहा है। दरअसल 2016 में अमृत योजना के तहत 35 करोड़ रुपए इसलिए मिले थे ताकि शहर में कोई एक ऐसा मॉडल तैयार किया जा सके, जहाँ 24 घंटे पानी मुहैया कराया जाए। केंद्रीय कानून मंत्री के इशारे पर इंदिरा कॉलोनी और सुभाषपुरा को चुना गया। पीएचईडी ने इस पर काम 2018 में शुरू कर दिया। सुभाषपुरा में इसके लिए टंकी बनाई गई, जो अभी भी है। उसी टंकी से इंदिरा कॉलोनी और सुभाषपुरा में प्रत्येक घर के नए कनेक्शन किए गए। इसमें स्टील के पाइप उपयोग में लाए गए। जो पाइप नाले-नालियों से होकर आ रहे थे, उन्हें भी दूर किया गया। होना यह था कि बीछवाल से सुभाषपुरा टंकी तक एक अलग से पाइपलाइन बिछानी थी, ताकि 24 घंटे बीछवाल से इस टंकी को पानी मिल सके, मगर तत्कालीन पीएचईडी अधिकारियों ने यह न करके मंडी के पास किसान भवन से मुख्य लाइन से कनेक्शन कर इस टंकी तक पानी लाया। क्योंकि बीछवाल से लाइन में 24 घंटे पानी नहीं आता, इसलिए सुभाषपुरा वाली टंकी तक भी 24 घंटे पानी नहीं पहुँचा और जब टंकी पर नहीं पहुँचा तो लोगों के घरों में भी सिर्फ सप्लाई के समय 2 घंटे पानी पहुँचा। भास्कर ने जब सोमवार को पड़ताल की और “सातों दिन 24 घंटे जलापूर्ति के सपने दिखाकर खर्च कर दिए 35 करोड़ रुपए, दो घंटे ही लोगों को मिल रहा पानी” हेडिंग से खबर लगाई, उसके बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच पीएचईडी अधिकारियों को सौंपी। “पीएचईडी के मौजूदा अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट का कुछ नहीं पता। हैरानी है कि केंद्र से आए 35 करोड़ पूर्व के अभियंता डकार कर चले गए। 24 घंटे में दो घंटे पानी आता है, फिर आखिर पैसा गया कहाँ। मैं इसकी तह तक जाऊँगा।”
-भगवान सिंह मेड़तिया, भाजपा नेता “मैंने मामले की जांच अधीक्षण अभियंता को सौंपी है। एक्सईएन को कहा कि इस प्रोजेक्ट की पूरी फाइल, ठेकेदार की लाइबिलिटी और उसके काम का पूरा ब्यौरा चाहिए। अगर इसमें कोई दोषी होगा, विभाग एक्शन लेने से पीछे नहीं हटेगा।”
राजेश राजपुरोहित, एडीशनल चीफ इंजीनियर, पीएचईडी एक्सईएन खंगाल रहे दस्तावेज सोमवार को जैसे ही भास्कर में खबर प्रकाशित हुई, तो दस्तावेजों की सार-संभाल शुरू हो गई। 3 घंटे तक तो स्टाफ कहता रहा कि इसका कोई कागज नहीं है। इसी बीच इंदिरा कॉलोनी निवासी और भाजपा नेता भगवान सिंह मेड़तिया, युवा मोर्चा अध्यक्ष वेद व्यास समेत तमाम लोग पीएचईडी ऑफिस पहुँच गए। खबर दिखाते हुए कहा कि आखिर इंदिरा कॉलोनी में 24 घंटे पानी क्यों नहीं आ रहा। और नहीं आ रहा तो 35 करोड़ खर्च का हिसाब दो। एडीशनल चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता के ऑफिस में इसका कोई कागज नहीं मिला। फिर मौके पर एक्सईएन को बुलाया गया और सारे दस्तावेज खंगालने के लिए कहा गया। अधीक्षण अभियंता को इसकी जांच सौंपी गई और कहा गया कि हर हाल में पूरा हिसाब, ठेकेदार की जिम्मेदारी और उसकी कार्यप्रणाली का पूरा विवरण चाहिए।


