देश-दुनिया के कला जगत में आज खामोशी छाई है। सभी का चेहेता चेहरा उस्ताद जाकिर हुसैन और उनका तबला खामोश हो गया। जयपुर के कई कलाकारों से उनका दिली रिश्ता रहा। इनमें कावा ब्रास बैंड के डायरेक्टर हमीद खान कावा उनके चेहते तबला नवाज रहे। उस्ताद जाकिर हुसैन के यूं अचानक दुनिया से रुखसत हो जाने से हमीद खान कावा बेहद दु:खी हैं। वे कहते हैं कि जाकिर हुसैन उनके रहबर थे। उन्होंने बताया कि उनके आमेर स्थित उनके घर पर उस्ताद जाकिर हुसैन का काफी आना जाना रहा। वे चाय भी खुद बनाया करते थे और साथ में उस्ताद के बजाए अरे हुजूर वाह! चाय बोलिए… कहते थे। हमीद खान ने बताया कि जाकिर हुसैन की दो बेटियां हैं। एक बेटी की शादी में खुद हमीद खान के निर्देशन में कावा ब्रास बैंड वादन हुआ था। उन्होंने बताया कि वे इतने सुरीले थे कि संगीत में छोटी गलती भी बर्दाश्त नहीं करते थे। इसलिए कावा ब्रास बैंड की प्रस्तुति पर वे काफी खुश नजर आए। हमीद खान ने बताया विदेश में भी जाकिर हुसैन ने उन्हें काफी सपोर्ट किया जिसे वे कभी फरोमोश नहीं कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिका में भी जाकिर हुसैन घंटों ही रियाज करते थे। उन्हें देखने भर से हर कलाकार कुछ न कुछ सबक जरूर लेता था। हमीद ने कहा कि उस्ताद जाकिर हुसैन के साथ बिताए कई पल उनकी यादों में हमेशा जिन्दा रहेंगे। हमीद कावा ने बताया कि जयपुर में उनकी कई परफॉर्मेंस यादगार रहीं। चाहे बिड़ला सभागार हो या सेंट्रलपार्क उन्हें सुनने व देखने के लिए बड़ी तादाद में संगीत के दीवाने जुट जाया करते थे। यहां सेंट्रलपार्क में संतूर के शहंशाह रहे पं. शिवकुमार शर्मा का कॉन्सर्ट था। उसमें तबले पर उस्ताद जाकिर हुसैन थे। संतूर साज पर राग की आलापचारी के दौरान माहौल काफी चुप था। जब उस्ताद जाकिर हुसैन ने तबले पर एक अंगुली लगाई तो समूचा माहौल दानिशमंद श्रोताओं की तालियां से गूंज उठा। तब आला फनकार जाकिर हुसैन ने बोला खास कलाकार तो पं.शिवकुमार शर्मा हैं, मैं तो उनकी संगत कर रहा हूं। यही सादगी और कला की इबादत इस मकबूल फनकार की जिन्दगी के आखिर पड़ाव तक बनी रही। उन्हें तहे दिल से शुक्रिया बोलता था तो मुस्कुराकर कहते थे जनाब! तहे अल्फाज मत इस्तेमाल कीजिए, ऐसा लगता कोई तहखाने की बात कर रहा हो। हालांकि तबला साज पर उनकी थाप जरूर थम गई हों पर, उनकी बादशाहत कई युगों तक कायम रहेगी।


