झारखंड अधिविद्य परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में शासी निकाय गठित करने में नियम की अनदेखी करने का मामला सामने आया है। जैक के अधिनियम के अनुसार धर्म और भाषा के आधार पर सरकार द्वारा संचालित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं पर यह नियम लागू नहीं होता है। बावजूद पिछले 20 सालों से जैक द्वारा प्रस्वीकृति अल्पसंख्यक इंटर कॉलेज, माध्यमिक विद्यालय और मदरसों के लिए शासी निकाय गठन किया जा रहा है, जो नियम के अनुसार गलत है। झारखंड अधिविद्य परिषद अधिनियम 2006 के तहत जैक को प्रस्वीकृत यानि मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं के लिए शासी निकाय गठन की शक्ति दी गई है। लेकिन शिक्षण संस्थानों पर पर यह प्रावधान लागू नहीं होता है। अल्पसंख्यक को छोड़ राज्य के अन्य प्रस्वीकृत शिक्षण संस्थानों के लिए यह नियम है। इसके बाद भी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में शासी निकाय गठन किया जा रहा है। गठित हो रहे शासी निकाय को निरस्त करना चाहिए अधिनियम 2006 में किया गया था प्रावधान झारखंड अधिविद्य परिषद 2004 के अधिनियम में शासी निकाय गठन की कोई व्यवस्था नहीं थी। लेकिन 2006 में इस संबंध में प्रावधान जोड़ा गया। इसके बाद से परिषद द्वारा प्रस्वीकृत सामान्य एवं अल्पसंख्यक संस्थाओं के शासी निकाय गठन की प्रक्रिया शुरू हुई है। लेकिन यह कदम उस कानून के प्रतिकूल है, जो विशेष रूप से अल्पसंख्यक संस्थाओं को इस प्रक्रिया से बाहर रखता है। राज्य के प्रस्वीकृत संस्थान स्कूल की कैटेगरी संख्या सामान्य माध्यमिक 253 अल्पसंख्यक माध्यमिक 56 सामान्य इंटर कॉलेज 136 अल्पसंख्यक इंटर कॉलेज 22 सरकारी सहायता प्राप्त मदरसा 187 अनुदानित मदरसा 34


