अवैध खनन की गंभीर तस्वीर आई सामने:मुख​बिर तैनात कर पूरी रात रेत की अवैध खुदाई

बिलासपुर के सेंदरी और घुटकू रेत घाटों पर पूरी रात रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन का खेल बेरोकटोक चलता है। माफियाओं ने यहां ऐसा मजबूत नेटवर्क खड़ा कर रखा है, जो बाहरी लोगों की गतिविधियों पर नजर रखता है और तुरंत सूचना पहुंचा देता है। दैनिक भास्कर की टीम ने रविवार रात करीब तीन बजे दोनों घाटों पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया, जहां अवैध खनन की गंभीर तस्वीर सामने आई। जिले में अमलडीहा, उदईबंद, सोढ़ाखुर्द और करहीकछार घाट ही वैध हैं, लेकिन इसके बावजूद रोजाना 15-20 घाटों से रेत की अवैध खुदाई की जा रही है। रेत के इस अवैध कारोबार में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के नेताओं के साथ-साथ शराब कारोबारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। रात के अंधेरे में भी घाटों पर अंधाधुंध खुदाई जारी रहती है। भास्कर टीम जब सेंदरी रेत घाट पहुंची तो पुल के नीचे से लगातार ट्रैक्टर निकलते दिखाई दिए। मौके पर पांच ट्रैक्टर रेत लेकर बाहर जाते दिखे। वहीं, दो युवक संदिग्ध हालत में मौजूद थे। उनकी गतिविधियों से साफ था कि उन्हें विशेष रूप से निगरानी और सूचना देने के लिए तैनात किया गया है। जैसे ही कोई बाहरी व्यक्ति घाट की ओर बढ़ता है, ये युवक तुरंत मोबाइल के जरिए माफियाओं को जानकारी दे देते हैं। इसके बाद टीम घुटकू रेत घाट पहुंची। यहां भी इसी तरह का संगठित नेटवर्क सक्रिय मिला। घाट के आसपास दो लोग तैनात थे, जिनका काम रात के समय आने-जाने वालों पर नजर रखना था। घाट पर करीब 10 ट्रैक्टर रेत की लोडिंग में लगे हुए थे। अंधेरे के बावजूद वाहनों की आवाजाही लगातार जारी थी। शराब और पैसे के बदले पूरी रात निगरानी
सूत्रों के अनुसार, रोजाना रात में लगभग हर रेत घाट पर माफिया के लोग सक्रिय रहते हैं। ट्रैक्टर चालक, मजदूर और कर्मचारी तक वहां नजर आते हैं। जिन्हें मुखबिरी का जिम्मा दिया जाता है, उनके लिए माफिया शराब का भी इंतजाम करता है। रुपए तो मिलते ही हैं, साथ ही पीने के लिए शराब मिलने से वे पूरी रात घाट पर डटे रहते हैं। सुबह होते ही ये लोग घर लौट जाते हैं। किसी की पहुंच न हो, इसलिए रास्ते में रेत के ढेर लगा दिए
घुटकू घाट तक पहुंचना आसान नहीं था। रास्ते में जानबूझकर रेत के ढेर लगा दिए गए थे, ताकि किसी भी सामान्य वाहन की आवाजाही बाधित हो और बाहरी लोग आसानी से घाट तक न पहुंच सकें। यह व्यवस्था भी माफियाओं की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से इन घाटों पर रात के अंधेरे में अवैध खनन और परिवहन हो रहा है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।

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