पाकुड़ जिले में पत्थर और कोयला खनन से होने वाली राजस्व वसूली को और मजबूत करने के साथ अवैध खनन पर रोक लगाने की तैयारी की गई है। जिला खनन पदाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि नए साल में सभी खनन पट्टाधारियों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। डीजीएमएस के दिशा-निर्देशों के अनुसार, खनन क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और नियमित ब्लास्टिंग प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पट्टाधारियों को खनन क्षेत्र के आसपास वृक्षारोपण करना होगा और धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव सुनिश्चित करना होगा। 1200 करोड़ रुपए के राजस्व का लक्ष्य अवैध खनन और परिवहन पर नकेल कसने के लिए एक विशेष जिला टास्क फोर्स का गठन किया गया है। विभाग को चालू वित्त वर्ष में 1200 करोड़ रुपए के राजस्व का लक्ष्य मिला है, जिसमें से अब तक 850 करोड़ रुपए (70%) की वसूली की जा चुकी है। शेष 30% राजस्व अगले तीन महीनों में वसूल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिले में राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत कोयला खनन है। डीएमएफटी फंड के तहत अब तक 130 करोड़ रुपए का संग्रह किया जा चुका है। विभाग का विशेष ध्यान पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व वृद्धि पर है, साथ ही सुरक्षा मानकों और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।


