असम से नशा मुक्ति यात्रा पर निकले पल्लव देव गौरेला-पेंड्रा-मरवाही पहुंचे। कोटमी कला और रूमगा गांव में स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। पल्लव का उद्देश्य देश के युवाओं को नशे के दुष्परिणाम समझाना और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। सेना में जाने का सपना अधूरा, अब नशा मुक्त भारत का संकल्प असम के पल्लव देव ने भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा का सपना देखा था। उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत भी की, लेकिन मेडिकल जांच में ‘कलर ब्लाइंडनेस’ के कारण चयन नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने देश सेवा का नया रास्ता चुना। नशा मुक्त भारत के लिए पैदल यात्रा श्रीभूमि जिले के रानीबारी गांव के रहने वाले पल्लव ने युवाओं को नशे से दूर रखने का संकल्प लिया। हाथ में तिरंगा लेकर उन्होंने पैदल भारत यात्रा शुरू की। अपनी यात्रा के 294वें दिन वह छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले पहुंचे। अब तक वह असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश से गुजरते हुए 6,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं।


