जीवन में चुनौतियां हर किसी के सामने आती हैं, लेकिन उन्हें अवसर में बदलने की ताकत कुछ ही लोगों में होती है। दृष्टिहीन होकर भी सफलता की नई इबारत लिखने वाले उद्यमी और मोटिवेशनल स्पीकर श्रीकांत बोला ने शहर पहुंचकर वीआरटीसी ब्लाइंड स्कूल के छात्रों से मुलाकात कर उन्हें अपने जीवन का प्रेरणादायक सफर सुनाया। भारतीय उद्यमियों के समूह(आईईसी) द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अपनी दृष्टिहीनता को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। भास्कर के साथ खास बातचीत में उन्होंने कहा कि आंखों की रोशनी हो या न हो लेकिन जिंदगी में विजन क्लीयर होना चाहिए। पैदा होने पर माता-पिता को लोगों ने कहा कि इसे मार दो, यह बोझ बन जाएगा, लेकिन जब होश संभाला तो ठान लिया कि मैं इस दुनिया को दिखाऊंगा कि क्या कर सकता हूं। अगर आप मानते हो कि ब्लाइंड लोग कुछ नहीं कर सकते, तो यह आपकी सोच की ब्लाइंडनेस है। सोच बदलो, नजरिया बदलो। अंधा तो हूं, लेकिन गंदा कभी नहीं बनूंगा श्रीकांत ने बताया कि उन्होंने अपनी कंपनी शुरू करने के वक्त कई ताने सुने। 2012 में जब वेस्ट से वर्ल्ड-क्लास प्रोडक्ट बनाने की सोची, तो लोगों ने कहा कि यह पहले से अंधा था, अब कचरा लेने से गंदा भी बन जाएगा। लेकिन मैंने जवाब दिया कि मैं अंधा तो हूं, लेकिन गंदा कभी नहीं बनूंगा। मैं इसी कचरे को बदलूंगा। उनका मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि उन लोगों को रोजगार देना है जिनके पास कोई काम नहीं है। छात्रों के लिए संदेश : बड़ा सपना देखो, मेहनत करो और उन्हें पूरा करो {हम सफलता कैसे हासिल कर सकते हैं? -जब तक कुछ करोगे नहीं, तब तक बदलाव नहीं आएगा। हर चीज नामुमकिन लगती है जब तक उसे करने की कोशिश न की जाए। जिम्मेदारी से पढ़ाई करो, सपनों को पूरा करने का संकल्प लो। एक न एक दिन सफलता जरूर मिलेगी। {कोई बड़ी समस्या आए तो क्या करें? -जब भी मुश्किल हालात आएं, खुद से एक सवाल करो अगर श्रीकांत कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं? { हम आपकी तरह कैसे बन सकते हैं? -मेरी तरह बनने के लिए हमेशा अपना विजन क्लियर रखो। हर चीज में रूचि लो, ऑलराउंडर बनो, नई चीजें सीखते रहो और अपने सपने को सबसे ऊपर रखो। श्रीकांत ने छात्रों को संदेश देते हुए कहा, भगवान तुम्हें शुरुआती परिस्थितियां दे सकते हैं, लेकिन अपना भाग्य तुम्हें खुद बनाना होगा। अपने सपनों पर विश्वास रखो और उन्हें पूरा करने के लिए सही उम्र में मेहनत करो। डर से मत घबराओ, उसका सामना करो। इस दौरान छात्रों ने उनसे कई सवाल पूछे जिनके श्रीकांत ने प्रेरणादायक जवाब दिए।


