छत्तीसगढ़ के धमतरी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने दो दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन गांधी मैदान में आयोजित किया गया, जिसमें सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया। प्रदर्शन के दौरान, कार्यकर्ताओं ने ‘मुसवा होगे बदनाम’ जैसे गाने गाकर अपना विरोध जताया। उनका आरोप था कि 19 करोड़ रुपये के धान घोटाले में ‘मुसवा’ (चूहे) को बदनाम किया गया, जबकि यदि यह राशि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी जाती तो उन्हें प्रदर्शन करने की नौबत नहीं आती। धरना प्रदर्शन के बाद, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने गांधी मैदान से शहर के विभिन्न चौकों से होते हुए एसडीएम कार्यालय तक एक रैली निकाली। उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष रेवती वत्सल ने बताया कि उनकी मुख्य मांगें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शासकीय कर्मचारी का दर्जा देना, बुढ़ापे में पेंशन प्रदान करना और शासकीय कर्मचारी घोषित होने तक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना है। वत्सल ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र खुले हुए 50 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इस अवधि में वेतन केवल 10,000 रुपये तक ही पहुंचा है, जिससे कार्यकर्ताओं की स्थिति दयनीय बनी हुई है। उन्होंने सरकार पर महिला सशक्तिकरण की बात करने के बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का शोषण करने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे शासन के सभी विभागों का काम पूरा करती हैं, लेकिन जब मानदेय और वेतन बढ़ाने की बात आती है, तो सरकार ‘गूंगी-बहरी’ हो जाती है।


