महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक (आईसीडीएस) ओपी बुनकर ने अधिकारियों को आंगनबाड़ी में पोषण वाटिकाओं एवं अन्य विकास कार्यों को गति प्रदान कर जल्द पूरा करने निर्देश दिए हैं। उन्होंने बारां जिले में संचालित सामान्य आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी पर विकास कार्यों को समय पर पूरा किया जाना सुनिश्चित किया जाए। राज्य के तीन जिलों बारां, करौली एवं धौलपुर में संचालित 213 सामान्य आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी केद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। उनकी प्रगति की समीक्षा के लिए संबंधित जिलों के उप निदेशकों एवं संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) की वी सी के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में निदेशक ने धौलपुर एवं करौली जिले के कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया जबकि बारां जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने डिस्टेंम्पर, बाला पेंटिंग के साथ आरओ, एलईडी एवं पोषण वाटिका के कार्य समय पर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। निदेशक आईसीडीएस को उपनिदेशक बारां ने बताया कि डिस्टेंपर एवं बाला पेंटिंग के कार्य में निविदा की दर 50 प्रतिशत होने से 50 प्रतिशत राशि बाकी) रह गई है। निदेशक बुनकर ने इस पर तीनों जिलों के उपनिदेशकों एवं संबंधित सीडीपीओ को निर्देशित किया कि जिस आंगनबाड़ी केन्द्र पर निदेशालय से जारी राशि में दिनांक 8 अप्रैल 2025 तक निविदा की दर के कारण एवं एवं मौके पर संभव नहीं होने वाले कार्यों के कारण राशि बाकी रह रही है, तो ऐसी परिस्थिति में उसी आंगनबाड़ी केंद्र के अन्य आवश्यक विकास कार्य पर वह राशि निदेशक आईसीडीएस की अनुमति से आगामी 15 दिवस में उपयोग में लिया जाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि भारत सरकार से इस वित्तीय वर्ष में जारी होने वाली राशि प्राप्त की जा सके।


