आंधी और बारिश के दौरान बार-बार फॉल्ट आते हैं

जिले में करीब 20 करोड़ से 8 नए सब-स्टेशन की स्वीकृति मिली है। इनमें से 6 के लिए अब तक जमीन नहीं मिली है। सिर्फ जमीन चिन्हांकन किए हैं। वहीं सेमो में जमीन तो मिल गई है लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हुआ है। पहाड़ों से घिरे बोड़ला ब्लॉक के दूरस्थ गांव दलदली (दरई) में जनवरी 2025 में 3.20 करोड़ रुपए के बिजली सब-स्टेशन का भूमिपूजन हुआ था। तब ग्रामीणों को लगा था कि अब उनकी वर्षों पुरानी बिजली समस्या खत्म होगी। लेकिन शिलान्यास के बाद एक साल तक सन्नाटा रहा। अब एक साल बाद फरवरी 2026 में मशीनें लाई गई हैं। गड्ढे खोदे जा रहे हैं। खंभों की लाइन के लिए बरघाट से दलदली घाट तक निशान लग रहे हैं। यह काम बिजली कंपनी के प्रोजेक्ट डिपॉर्टमेंट के जिम्मे है। आज की स्थिति यह है कि तरेगांव से निकलने वाली 11 केवी भरतपुर फीडर के जरिए करीब 70 किलोमीटर लंबी लाइन से दलदली क्षेत्र के 24 गांवों को बिजली दी जा रही है। यह लाइन घने जंगल से गुजरती है। इसके साथ ही पहाड़ी ढलानों पर फैली है। बारिश और आंधी में बार-बार फॉल्ट होते हैं। इसके कारण अक्सर लो वोल्टेज रहता है। बार-बार ट्रिपिंग होती है। घंटों बिजली गुल की समस्या रहती है। लाइनमैन को फॉल्ट ढूंढने में कई घंटे लग जाते हैं। बिजली कंपनी के प्रोजेक्ट डिपॉर्टमेंट के ईई रविंद्र कुमार गोस्वामी का कहना है कि स्वीकृत सभी सब-स्टेशन निर्माण के लिए टेंडर हो चुके हैं। हर सब-स्टेशन के लिए न्यूनतम 40×60 मीटर (2400 वर्गमीटर) जमीन चाहिए। जमीन आवंटन की प्रक्रिया के कारण दलदली में देरी हुई। अब प्रक्रिया तेज की जा रही है। जिले में कुल 8 सब-स्टेशन स्वीकृत हैं। इनमें सेमो, दुबहा, कोयलारी डीह, सरेखा, दलदली, पौनी, भुवालपुर और नया बस स्टैंड कवर्धा शामिल है। औसतन 2.50 करोड़ की लागत से करीब 20 करोड़ का पूरा प्रोजेक्ट है। शासन से राशि स्वीकृत। टेंडर प्रक्रिया पूरी। जमीन चिह्नांकित कर लिए हैं, लेकिन राजस्व विभाग से औपचारिक हैंडओवर नहीं होने से अड़चन आ रही है। इसलिए निर्माण में दरी होगी। सुविधा के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

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