आइरिश स्कैनर मशीन से पूरे राज्य में हो रहा है केवाईसी

भास्कर न्यूज|गुमला आपूर्ति विभाग की ओर से राशन कार्डधारियों के लाभुकों का ई-केवाईसी किया जा रहा है। इसकी अंतिम तिथि 30 अप्रैल है। जिले में कुल 738 जनवितरण प्रणाली का दुकान हैं। कुल एक लाख 68 हजार 978 कार्डधारी हैं। जिसमेंे आठ लाख 21 हजार 531 सदस्य शामिल हैं, लेकिन डीलर द्वारा अबतक पांच लाख 57 हजार 150 लोगों का केवाईसी हो पाया है। केवाईसी नहीं होने का कारण आइरिश स्कैनर मशीन मात्र जिले को 18 ही दी गई है। डीलर नाम नही छापने के शर्त पर बताया कि नगर परिषद क्षेत्र में कुल 35 डीलर हैं। जिसमें मो. तनवीर व विनोद कुमार सिंह को ही आइरिश स्कैनर मशीन दी गई है। इसलिए केवाईसी संभव नहीं हो पाया है। वही केवाईसी नहीं होने के कारण झारखंड के 24 जिलों में गुमला जिला का 67.69 प्रतिशत अंक के साथ 23वां पायदान पर है। आइरिश मशीनों को ही रोटेट कर हर जन वितरण के लाभुकों का ई-केवाईसी करना है। बताया जाता है कि जिले में कई हजार वृद्ध भी शामिल है। जिनके हाथ कांपते हैं। वहीं हाथ कांपने वाले दिव्यांगों की संख्या भी हजारों में है। आइरिश मशीन की संख्या कम रहने से सभी वृद्ध और दिव्यांग का ई-केवाईसी करने में परेशानी हो रही है। इसको लेकर कई दुकानदारों को मशीन मिल भी नहीं पाई। डीलरों का कहना है कि मशीन नही होने के कारण दो लाख 64 हजार 381 लोगो का केवाईशी नहीं हो सका है। आंखों की पुतलियों को स्कैन करती है आइरिश मशीन : पीडीएस दुकानों को ई-केवाईसी के लिए कार्डधारियों की संख्या मशीन दी गई है। यह मशीन बायोमेट्रिक केवाईसी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो अंगूठे के निशान से केवाईसी नहीं करवा पा रहे हैं। अब वे अपनी आंखों की स्कैनिंग के माध्यम से ई-केवाईसी करवा सकते हैं, जिससे उन्हें अपना राशन कार्ड अपडेट करने में मदद मिलेगी। कुछ लाभुक केवाईसी नहीं कराना चाह रहे हैं, कुछ नेटवर्क की समस्या है, विभाग निर्णय लेगा : डीएसओ जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रीतिलता किस्कू ने कहा कि 30 अप्रैल तक अंतिम तिथि दिया गया है। पेडिंग होने का वजह ये भी है कि कई लाभुक दोहरा लाभ ले रहे हैं। वे केवाईसी कराना नहीं चाहते हैं और कई लाभुक का निधन भी हो गया है। उसके परिजन लाभ ले रहे हैं और वह भी केवाईसी नहीं कराना चाहते हैं, कुछ नेटवर्क का भी प्रॉब्लम है। हालांकि विभाग ही कुछ निर्णय निकालेगा। आइरिश स्कैनर मशीन।

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