भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के एक असिस्टेंट प्रोफेसर साइबर ठगी का शिकार हो गए। कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर आए एक फोन कॉल के बाद उन्होंने जैसे ही एक लिंक पर अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी भरी, उनके खाते से 1 लाख 78 हजार 910 रुपए निकल गए। घटना 31 दिसंबर 2025 की है, लेकिन मामले में अब जाकर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की है। मामले में बीटा बिल्डिंग, आईआईटी निवास में रहने वाले डॉ. अविजित साहा (37) ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे आईआईटी भिलाई में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। घटना से करीब एक महीने पहले उनके क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन लेन-देन करने में दिक्कत आ रही थी। वे बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क करने की सोच ही रहे थे। कॉल करने वाले ने खुद को बताया बैंक का प्रतिनिधि
इसी बीच 31 दिसंबर 2025 को उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताया। उसने प्रोफेसर से कार्ड में आ रही समस्या के बारे में पूछा। कॉल करने वाला पूरी तरह से भरोसेमंद लग रहा था, इसलिए उन्होंने उसे अपनी परेशानी बता दी। कॉलर ने इसके लिए एक लिंक भेजा। प्रोफेसर के मोबाइल पर जो लिंक आया, वह देखने में बैंक की आधिकारिक वेबसाइट जैसा लग रहा था। उस पर बैंक का नाम और डिजाइन भी असली वेबसाइट जैसा ही दिख रहा था। कॉलर ने कहा कि लिंक पर लॉग-इन कर कार्ड की डिटेल भर दें, जिससे प्रॉब्लम सॉल्व हो जाएगी। क्रेडिट कार्ड की जानकारी देना पड़ा भारी
प्रोफेसर ने लिंक खोलकर अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी दर्ज कर दी। जैसे ही उन्होंने डिटेल भरी, उनके मोबाइल पर ट्रांजेक्शन का मैसेज आया। कार्ड से 1 लाख 78 हजार 910 रुपए कट चुके थे। यह देखकर वे घबरा गए। उन्हें समझ आ गया कि उनके साथ ठगी हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद स्थानीय पुलिस थाने में भी रिपोर्ट दी गई। घटना के करीब दो महीने बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है।


