दमोह जिले के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर और दमोह शहर में बुधवार को युगप्रधान आचार्यश्री विद्यासागर महाराज का द्वितीय पुण्य समाधि दिवस मनाया गया। इस अवसर पर दिन भर धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चला, वहीं शाम को दीपदान के माध्यम से गुरुवर के प्रति अगाध श्रद्धा प्रकट की गई। कुंडलपुर में गूंजी गुरु भक्ति और शांति धारा सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में समाधि दिवस के उपलक्ष्य में विशेष पूजा-अर्चना और शांति धारा आयोजित की गई। इस दौरान देशभर से आए श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर आचार्यश्री की आरती उतारी। कार्यक्रम में मौजूद क्षुल्लिका रत्न सुनयश्री माताजी ने आचार्यश्री को विनयांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज बड़े बाबा का जो विशाल मंदिर आकार ले रहा है, वह आचार्यश्री के मंगल आशीर्वाद और संकल्पों का ही परिणाम है। उन्होंने गुरुवर के वात्सल्य और गुरु सेवा के संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उन्होंने समाज को जीवन जीने और समाधि की श्रेष्ठ कला सिखाई है। कीर्ति स्तंभ पर हुआ भव्य दीपदान बुधवार रात दमोह शहर के हृदय स्थल कीर्ति स्तंभ पर श्री दिगम्बर जैन पंचायत और जैन मिलन के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। समाज के लोगों ने सैकड़ों दीप जलाकर कीर्ति स्तंभ को रोशन किया और सामूहिक आरती की। इस दौरान धार्मिक भजनों और गीतों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आयोजन की खास बात यह रही कि जैन समाज के साथ-साथ अन्य समाजों के लोग भी बड़ी संख्या में गुरुवर को श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे। गुरु के सिद्धांतों को दोहराया कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने आचार्यश्री द्वारा बताए गए मार्ग अहिंसा, जीव दया और स्वदेशी के संकल्पों को दोहराया। उपस्थित जनसमूह ने आचार्यश्री के चरणों में वंदन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कुंडलपुर कमेटी और जैन पंचायत के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर गुरुवर के जीवन दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही।


