देश के आम नागरिकों को भले ही पासपोर्ट बनवाने में थोड़ी बहुत समस्या का सामना करना पड़ता हो। पर आजमगढ़ जिले के रहने वाले प्रभु नाथ ने 20 वर्षों में चार पासपोर्ट बनवाकर पुलिस लोकल इंटेलीजेंस और पूरे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 1996 से लेकर 2016 तक इन 20 वर्षों में प्रभुनाथ यादव ने आजमगढ़ जिले से तीन और गोरखपुर से एक पासपोर्ट जारी करवा कर पूरे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पासपोर्ट सत्यापन और जांच के नाम पर जमीनी स्तर पर किस कदर काम होता है। सरकार और प्रशासन यदि इस मामले की जांच करती है तो आजमगढ़ जिले में एक नाम से कई पासपोर्ट जारी होने के और भी मामले सामने आ सकते हैं। इस बात के इनपुट मिल रहे हैं। आरोपी प्रभु नाथ यादव ने जिस तरह से आजमगढ़ जिले के तीन थाना क्षेत्र जीयनपुर, रौनापार और मुबारकपुर के साथ-साथ गोरखपुर के बड़हलगंज थाना क्षेत्र से नाम पता के साथ अपने नाम और जन्मतिथि में परिवर्तन कर जिस तरह से सिस्टम में सेंधमारी कर खेल खेला है। इससे इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि इस तरह के रैकेट में और लोग भी शामिल है जो जांच की जद में आ सकते हैं। और इसका बड़ा दुरुपयोग भी हो सकता है। सबसे खास बात यह है कि आरोपी प्रभु नाथ यादव इन पासपोर्ट के सहारे बैंकाक और थाईलैंड की यात्रा भी कर चुका है। इसके बाद भी जिले की खुफिया एजेंसियां खाक छानती रह गई। सोशल मीडिया से खुली पोल आजमगढ़ जिले के नटवरलाल प्रभु नाथ यादव की पोल सोशल मीडिया से खुली। सोशल मीडिया के ट्विटर अकाउंट से आजमगढ़ पुलिस को किए गए ट्वीट में या बात बताई गई कि आरोपी प्रभु नाथ यादव ने चार पासपोर्ट बनवा रखे हैं। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद जिले के एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने इस मामले की जांच जीयनपुर थाना क्षेत्र के लाटघाट पुलिस चौकी इंचार्ज जफर खान को सौपी। अपनी जांच में जफर खान ने यह पाया कि आरोपी प्रभु नाथ यादव ने आजमगढ़ जिले के जीयनपुर थाना क्षेत्र रौनापार थाना क्षेत्र और मुबारकपुर थाना क्षेत्र के साथ गोरखपुर से भी पासपोर्ट जारी करवाया है। मामले की पुष्टि होते ही 26 दिसंबर की देर रात जीयनपुर कोतवाली में इस मामले में आरोपी प्रभु नाथ यादव के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471 मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस इस मामले में आरोपी प्रभुनाथ यादव के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश में जुट गई है। 1996 से शुरू हुआ प्रभुनाथ यादव का पासपोर्ट गेम आजमगढ़ जिले के रहने वाले प्रभु नाथ यादव का यह पासपोर्ट खेल 1996 से शुरू हुआ जो लगातार 2016 तक जारी रहा। प्रभु नाथ यादव का पहला पासपोर्ट आजमगढ़ जिले के जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के पते से बना। पहला पासपोर्ट प्रभु नाथ यादव पुत्र त्रिलोकी यादव ग्राम मोहम्मदपुर कोड़रा कोतवाली जीयनपुर के पते पर पहला पासपोर्ट लखनऊ से जारी हुआ। पहले पासपोर्ट का नम्बर B 450129 है। इस पासपोर्ट में आरोपी प्रभुनाथ ने अपनी जन्मतिथि 1 सितंबर 1976 दिखाई है। यह पासपोर्ट लखनऊ से 13 जून 1996 को जारी किया गया। दूसरा पासपोर्ट आरोपी प्रभु नाथ यादव ने दूसरा पासपोर्ट ग्राम चक्की हाजीपुर थाना रौनापार आजमगढ़ के नाम से बनवाया। इस पासपोर्ट में भी आरोपी ने अपनी जन्मतिथि 1 सितंबर 1976 दिखाई। यह पासपोर्ट 10 जून 2002 को लखनऊ ऑफिस से जारी किया गया। इस पासपोर्ट का नंबर E 2306352 है। तीसरा पासपोर्ट आरोपी प्रभु नाथ यादव ने अपना तीसरा पासपोर्ट बनवेट समय अपना नाम बदलकर दीनानाथ यादव कर लिया। इसके साथ ही आरोपी ने अपना पता भी बदल लिया। इस पासपोर्ट में आरोपी ने अपना गांव मझवलिया थाना बड़हलगंज जिला गोरखपुर दिखाया। इस पासपोर्ट में आरोपी ने अपनी जन्मतिथि में भी परिवर्तन किया। आरोपी ने तीसरे पासपोर्ट में अपनी जन्मतिथि बदलते हुए 2 अप्रैल 1975 दिखाया। यह पासपोर्ट 2 जुलाई 2009 को लखनऊ ऑफिस से जारी किया गया था। इस पासपोर्ट का नंबर H 5122388 है। चौथा पासपोर्ट आरोपी प्रभुनाथ यादव ने चौथा पासपोर्ट भी आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र के पत्ते से बनवाया। इस पासपोर्ट में आरोपी ने अपना पता ग्राम चुटही थाना मुबारकपुर जिला आजमगढ़ दिया है। इस पासपोर्ट में आरोपी ने एक बार फिर से अपनी जन्मतिथि में परिवर्तन किया। चौथे पासपोर्ट में आरोपी ने अपनी जन्मतिथि 1 जनवरी 1964 बताया। और यह चौथा पासपोर्ट 14 जून 2016 को लखनऊ पासपोर्ट ऑफिस से जारी किया गया। इस पासपोर्ट का नंबर P 0847882 है। सबसे बड़ा सवाल 4 पासपोर्ट का जिम्मेदार कौन ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उठता है कि जिस तरह से एक मामूली नटवरलाल ने आजमगढ़ जिले के तीन थाना क्षेत्र और गोरखपुर से एक कुल मिलाकर चार पासपोर्ट बनवा लिए। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन पुलिस थानों में पासपोर्ट की जांच जाती है और जिनका सत्यापन लोकल इंटेलीजेंस के माध्यम से कराया जाता है। वह दूर-दूर तक इस मामले में कहीं दिखता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में यदि जिले के पासपोर्ट धारकों के पासपोर्टों की जांच गहराई से की जाएगी तो कई ऐसे मामले और सामने आने की उम्मीद है जिसमें एक-एक व्यक्ति के दो से तीन पासपोर्ट बने हुए हैं। अब देखने वाली बात यह है कि पुलिस और इंटेलीजेंस के अधिकारी कर्मचारी इस मामले में कितनी रुचि लेते हैं। पासपोर्ट बनवाने में इन डॉक्यूमेंट की होती है जरूरत किसी भी व्यक्ति को अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, एड्रेस प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक पासबुक की जरूरत पड़ती है। इसके साथ ही पासपोर्ट बनते समय आंखों की रेटिना की स्क्रीनिंग होती है। बावजूद इसके आजमगढ़ के प्रभुनाथ यादव ने पूरे सिस्टम में सेंधमारी करके पासपोर्ट व्यवस्था जांच की पोल खोल दी।


