सीमावर्ती जिले जैसलमेर के चिकित्सा इतिहास में आजादी के बाद पहली बार जैसलमेर के सरकारी जवाहिर हॉस्पिटल में आँखों का अपना अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर (OT) शुरू किया गया है। इस सुविधा के शुरू होते ही न केवल मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, बल्कि जटिल ऑपरेशन भी सफलतापूर्वक शुरू हो गए हैं। इस नई शुरुआत की पहली और सबसे बड़ी सफलता 17 वर्षीय रवीना के रूप में सामने आई है, जिसकी फटी हुई आँख को जोड़कर डॉक्टरों ने उसकी दुनिया में फिर से उजाला भर दिया है। लकड़ी काटते समय हुआ था दर्दनाक हादसा शहर के पास की रहने वाली 17 वर्षीय रवीना पुत्री घेवरचंद घर पर लकड़ी काट रही थी। इसी दौरान लकड़ी का एक तीखा टुकड़ा बिजली की रफ्तार से उछला और सीधे उसकी आँख में जा धंसा। चोट इतनी जबरदस्त थी कि रवीना की आँख का काला हिस्सा (कॉर्निया) पूरी तरह फट गया। परिजन जब उसे लेकर जवाहिर हॉस्पिटल पहुंचे, तो रवीना दर्द से कराह रही थी और उसकी उस आँख से दिखना पूरी तरह बंद हो चुका था। पहले ऐसी स्थिति में मरीजों को तुरंत जोधपुर या अहमदाबाद रेफर कर दिया जाता था, लेकिन इस बार जवाहिर हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने चुनौती स्वीकार की। पहली बार जटिल ‘कॉर्नियल रिपेयर’ ऑपरेशन सफल पीएमओ डॉ. रवींद्र सांखला के कुशल निर्देशन में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव जोशी और उनकी टीम ने इस केस को हाथ में लिया। डॉ. जोशी ने बताया कि यह एक ‘क्रिटिकल मेडिकल इमरजेंसी’ थी। आँख के अंदरूनी हिस्सों में गहरा घर्षण था और भारी सूजन आ चुकी थी। जवाहिर हॉस्पिटल की नवनिर्मित अत्याधुनिक नेत्र यूनिट में रवीना का जटिल ऑपरेशन किया गया। करीब एक घंटे तक चले इस सूक्ष्म ऑपरेशन में फटे हुए कॉर्निया को बेहद सावधानी से रिपेयर किया गया। ऑपरेशन के बाद धीरे-धीरे सूजन कम हुई और अब रवीना की आँखों की रोशनी वापस आने लगी है। सफल उपचार के बाद अब रवीना को हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई है। आजादी के बाद पहली बार मिली यह सुविधा जैसलमेर के लोगों के लिए यह खबर किसी वरदान से कम नहीं है। सालों से जिले के लोग आँखों के छोटे-बड़े ऑपरेशन के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर थे। जैसे ही लोगों को पता चला कि जवाहिर हॉस्पिटल में अब आँखों के ऑपरेशन शुरू हो गए हैं, वहां ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें लगने लगी हैं। पीएमओ डॉ सांखला ने बताया- “अब मोतियाबिंद से लेकर कॉर्निया रिपेयर जैसे जटिल ऑपरेशनों के लिए जैसलमेर के गरीब तबके को जोधपुर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इससे समय और पैसा दोनों बचेगा।” वहीं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव जोशी बोले-“अस्पताल में नई मशीनों और आधुनिक ओटी की सुविधा मिलने से अब हम यहीं पर जटिल ऑपरेशन कर पा रहे हैं। रवीना का केस काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि देरी होने पर आँख में परमानेंट इन्फेक्शन फैल सकता था, जिससे रोशनी हमेशा के लिए जा सकती थी।” क्यों खास है जवाहिर हॉस्पिटल की नई नेत्र यूनिट? अत्याधुनिक मशीनें: हॉस्पिटल में अब वे तमाम मशीनें उपलब्ध हैं जो बड़े निजी अस्पतालों या महानगरों के सरकारी अस्पतालों में होती हैं। विशेषज्ञ टीम: डॉ. गौरव जोशी और उनकी टीम अब नियमित रूप से यहाँ जटिल सर्जरी कर रही है। मुफ्त इलाज: राज्य सरकार की योजनाओं के तहत ये तमाम महंगे ऑपरेशन यहाँ पूरी तरह निःशुल्क किए जा रहे हैं। समय पर इलाज है सबसे जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि आँख में लकड़ी, लोहा या कांच लगने पर उसे कभी भी हाथ से न मलें। ऐसी स्थिति में ‘गोल्डन ऑवर’ (शुरुआती कुछ घंटे) बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। रवीना के परिजनों ने भी यही समझदारी दिखाई और सीधे जवाहिर हॉस्पिटल पहुंचे, जिससे उसकी आँखों की रोशनी बच सकी। जवाहिर हॉस्पिटल की इस उपलब्धि पर जैसलमेर के वासियों ने खुशी जाहिर की है और जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग का आभार जताया है। अब जैसलमेर के बुजुर्गों को मोतियाबिंद के लिए भी दूसरे शहर जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।


