हेमंत | जालंधर चंद्र ग्रहण को महत्वपूर्ण खगोलीय व आध्यात्मिक घटना माना जाता है। इस बार फाल्गुन पूर्णिमा पर पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने के कारण होली और होलिका दहन की तिथियों व समय में विशेष बदलाव देखे जा रहे हैं। ग्रहण के कारण ही होलिका दहन 2 फरवरी तो होली 4 फरवरी को मनाई जा रही है। विद्वानों और जालंधर की मंदिर कमेटियों ने ग्रहण के दृष्टिगत पूजा और दर्शनों के समय में परिवर्तन की घोषणा की है। पं. संतोष शास्त्री व पं. गौतम भार्गव के अनुसार इस वर्ष ग्रहण और तिथियों का यह मेल भक्तों के लिए उत्साह और आध्यात्मिक चिंतन दोनों का अवसर लेकर आया है। उन्होंने बताया कि 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जिसका सूतक काल सुबह 6:23 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा। ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:48 बजे तक रहेगा। सूतक काल के दौरान सभी प्रकार के मांगलिक और धार्मिक कार्यों पर रोक रहेगी और मंदिर बंद रहेंगे। श्री सिद्ध बाबा केशव नाथ जी शेर सिंह कॉलोनी के मुख्य सेवादार प्रवीण महेंद्रू और राहुल बाहरी ने बताया कि शाम 7:30 बजे शुद्धिकरण के बाद ही भक्त दर्शन कर सकेंगे। चंद्र ग्रहण के दृष्टिगत विश्व प्रसिद्ध श्री देवी तालाब मंदिर के दर्शन और पूजा के समय में बदलाव किया गया है। मंदिर के महासचिव राजेश विज ने बताया कि ग्रहण के सूतक काल और धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए मंदिर के कपाट सुबह 4 बजे खोले जाएंगे और मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद विधिवत पूजन करके आरती की जाएगी। इसके उपरांत सुबह 6 बजे श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ग्रहण काल के दौरान मंदिर परिसर में भजन-संकीर्तन तो किया जा सकता है, परंतु मुख्य विग्रहों के स्पर्श और सार्वजनिक दर्शन पर रोक रहेगी। शाम 7 बजे मर्यादा अनुसार विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के साथ मंदिर के कपाट पुनः खोल दिए जाएंगे। ग्रहण के बाद विशेष आरती होगी। माई हीरां गेट स्थित माता चिंतपूर्णी मंदिर के महासचिव अनिल पाठक ने बताया कि मंगलवार को मंदिर सुबह 5 बजे खोला जाएगा। इसके बाद 5:45 पर आरती होगी और 6:10 बजे कपाट बंद कर दिए जाएंगे। ग्रहण समाप्ति के बाद शाम 7:15 बजे कपाट पुनः खुलेंगे और रात 10 बजे शयन आरती होगी। मलकां चौक स्थित नागेश्वर महादेव मंदिर के प्रधान राजेश राजा ने बताया कि सुबह 6 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। ग्रहण काल के दौरान देवी-देवताओं के दर्शन वर्जित रहेंगे। शाम 7 बजे मंदिर के कपाट पुनः खोले जाएंगे। इसके बाद परिसर का शुद्धिकरण और विधिवत पूजन संपन्न किया जाएगा, जिसके उपरांत ही श्रद्धालु महादेव के दर्शन कर सकेंगे।


