भास्कर न्यूज | जालंधर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सरकारें अपने राज्य में निवेश के नए मौकों के रूप में देख रही हैं। कॉर्पोरेट रोजाना के कामकाज को रफ्तार देने के परिप्रेक्ष्य में इसे देख रहे हैं, लेकिन इस बीच भाषाओं के विद्वानों की चिंता अलग है। इस बार की विश्व पंजाबी कॉन्फ्रेंस में 20 से 22 फरवरी तक खास मुद्दों पर मंथन होगा। आयोजन अमृतसर स्थित गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी कैंपस में आज से आरंभ हो रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अधिकतर डेटा अंग्रेजी में है, जबकि पंजाबी व बाकी स्थानीय भाषाओं का डेटा सीमित है। इस बीच स्थानीय भाषाओं के लिए दरपेश चुनौतियों व कैसे आर्टिफिशियल का लाभ लेकर भाषा का विस्तार संभव है, इन सभी बिंदुओं पर भाषा विद्वान मंथन कर रहे हैं। इस बार कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय ‘पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका” रखा गया है। इस वैश्विक आयोजन में दुनियाभर से पंजाबी विद्वान, साहित्यकार और तकनीक प्रेमी जुटेंगे। जालंधर से भी अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों से पंजाबी भाषा के स्टूडेंट्स व टीचर हिस्सा लेंगे। यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. करमजीत सिंह कॉन्फ्रेंस के संरक्षक हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कनवीनर प्रो. हरविंदर सिंह सैनी और कोऑर्डिनेटर डॉ. मनजिंदर सिंह की देखरेख में एक विशेष प्रबंधकीय कमेटी का गठन किया गया है। आज होगी विधिवत शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत आज दोपहर 2-30 बजेगोल्डन जुबली कन्वेंशन सेंटर में होगी। इसमें मुख्यातिथि पूर्व सांसद तरलोचन सिंह होंगे। पद्म भूषण प्रो. सरदारा सिंह जौहल और समाजसेवी सुरिंदरपाल सिंह ओबेरॉय सहित कई दिग्गज हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा। सांस्कृतिक शाम : शाम 5 बजे दशमेश ऑडिटोरियम में अमरजीत ग्रेवाल द्वारा लिखित नाटक ‘1675′ का मंचन किया जाएगा। सम्मान सत्र : सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा, जिसमें भाई साहिब भाई महिंदर सिंह (यूके.) और प्रसिद्ध वैज्ञानिक कंवरपाल सिंह सूरी को सम्मानित किया जाएगा। अकादमिक चर्चा में पंजाबी साहित्य और संस्कृति पर एआई के प्रभाव को लेकर दो विशेष सत्र आयोजित होंगे। कवि दरबार में शाम को प्रो. दीवान सिंह को समर्पित एक भव्य कवि दरबार सजेगा, जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह और मनजीत इंदिरा जैसे प्रसिद्ध कवि हिस्सा लेंगे।


