प्रदेश के आदिवासी स्टूडेंट्स के जाति-प्रमाण पत्र बनाने पर तेजी से एक्शन होगा। इसे लेकर खुद मुख्यमंत्री ने निर्देश जारी किए हैं। दरअसल मंगलवार को नई सरकार में बनी जनजाति सलाहकार परिषद की पहली बैठक हुई। CM विष्णुदेव साय ने इसकी अध्यक्षता की। आदिवासी इलाके के उन स्कूलों को लेकर भी बात हुई जहां टीचर्स की पोस्टिंग हुई नहीं है। वहां जल्द टीचर्स भेजे जाएंगे। ये बैठक विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में हुई। बैठक में जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक उन्नयन, प्रशासनिक सुधार और संस्कृति संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर अधिकारियों और मंत्रियों के बीच बात-चीत हुई। बैठक में कैबिनेट मंत्री और जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम माैजूद रहे। यहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जनजाति समुदाय की जनसंख्या 32% है। CM ने अधिकारियों से कहा कि जनजातीय समुदाय के जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी त्रुटियों के निवारण हेतु विस्तृत अध्ययन कर समाधान सुनिश्चित किया जाए। जनजातीय आस्था स्थलों के संरक्षण एवं विकास हेतु देवगुड़ी के साथ-साथ सरना स्थलों को भी शामिल करने की व्यवस्था की जाए। शिक्षा में सुधार हेतु आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक स्कूलों की समस्या को शीघ्रता से हल किया जाए। जनजातीय समुदाय की आर्थिक सशक्तिकरण योजनाओं पर प्रभावी अमल किया जाए, जिससे उनकी प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो। कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आदिवासी इलाकों में संस्कृति के संरक्षण के साथ विकास की दिशा में काम करेंगे। बैठक में तय किया गया कि जनजातीय बच्चियों के लिए छात्रावासों की संख्या और सुविधाओं में वृद्धि, जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं भर्ती प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता एवं जनजातीय क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, आदिवासियों की पारंपरिक आजीविका को सशक्त करने हेतु विशेष योजनाएँ लागू करना,जनजातीय कला, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष योजनाएँ लागू करना शामिल है। बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर प्रेजेंटेशन दिया।


