आदिवासी भूमि की खरीद बिक्री मामले में सीओ स्वत: ले सकते हैं संज्ञान

सिटी रिपोर्टर | जमशेदपुर/चांडिल सोनारी से कांदरबेड़ा आैर चांडिल के सापड़ा से गम्हरिया के बीच सड़क का निर्माण होने के बाद इस इलाके में भू माफिया सक्रिय रहे हैं। सरकारी भूमि, बंदोबस्त भूमि आैर आदिवासियों की भूमि की प्लॉटिंग कर बिक्री की जा रही है। 5 से 6 लाख रुपए कट्ठा की दर से जमीन की बिक्री की जाती है। कई स्थानों पर जमीन की घेराबंदी की गई है। अथवा पक्की संरचना का निर्माण करा लिया गया है। स्थानीय दबंग लोगों की सहायता से जमीन पर कब्जा कर बिक्री की जाती है। बिक्री का सारा खेल नोटरी एग्रीमेंट के आधार पर होता है। सापड़ा से गम्हरिया की ओर जाने वाली सड़क के किनारे पुड़ीसिली गांव में सरकारी भूमि पर अनिल सिंह सरदार व उनके लोगों की ओर से अतिक्रमण करने के लिए चहारदीवारी का निर्माण कराया जा रहा था। सड़क के किनारे करीब 500 फीट लंबाई वाले हिस्से में स्लैब डाल कर जमीन को सड़क के सामांतर समतल किया गया है। सूचना पर चांडिल सीओ प्रदीप कुमार महतो अपने मातहत कर्मचारियों के साथ अतिक्रमित जमीन पर पहुंचे। टीम को देखकर मजदूर व जमीन माफिया भाग गए। करीब 50 फीट लंबाई में जमीन की घेराबंदी कर ली गई है। जिस स्थान की चहारदीवारी का निर्माण चल रहा था उसके पिछले हिस्से में सरकारी भूमि का बड़ा भूभाग है। इसका खाता नंबर 234 आैर प्लॉट नंबर 218, 219 व 220 है। सरकारी जमीन की घेराबंदी करने के मामले में अंचल कार्यालय की सूचना पर कपाली थाना में अनिल सिंह सरदार समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण। सरकारी प्रावधान के अनुसार अगर आदिवासी भूमि पर किसी गैर आदिवासी की ओर से संरचना अथवा चहारदीवारी का निर्माण व बिना अनुमति खरीद बिक्री की जाती है तो संबंधित अंचल के अंचलाधिकारी को स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने का अधिकार है। सीओ जमीन को खाली कराने के लिए कार्रवाई कर सकते हैं। चांडिल सीओ प्रदीप महतो ने बताया कि इस इलाके में आदिवासी भूमि की नोटरी एग्रीमेंट के आधार पर बिक्री और चहारदीवारी निर्माण की जानकारी मिली थी। जब पहुंचे तो चहारदीवारी का निर्माण पाया।

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