आपातकाल के मीसाबंदी हेतराम कर्ष का निधन:कोरबा में राजकीय सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई; आपातकाल के दौरान 18 महीने तक जेल में थे

कोरबा में आपातकाल के दौरान 18 महीने जेल में रहे मीसाबंदी हेतराम कर्ष का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। बालको क्षेत्र के भदरापारा निवासी हेतराम पिछले दो सप्ताह से अस्वस्थ चल रहे थे। गुरुवार को बालको के विभागीय अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रशासन को सूचना मिलने पर कार्यपालिक दंडाधिकारी की निगरानी में सशस्त्र बल के जवानों ने उन्हें तिरंगा अर्पित कर राजकीय सम्मान दिया। कोरबा तहसीलदार भूषण सिंह मंडावी ने बताया कि हाल ही में गजट में इस आशय के आदेश का प्रकाशन हुआ था। बता दें कि भाजपा सरकार ने मीसाबंदियों को लोकतंत्र सेनानी की उपाधि दी है। इंदिरा गांधी के कार्यकाल में आपातकाल के दौरान कई नेताओं के साथ हेतराम भी 18 महीने तक जेल में रहे। सरकार मीसाबंदियों को सम्मान स्वरूप पेंशन भी प्रदान करती है। पार्थिव शरीर पर तिरंगा और पुष्प माला अर्पित कर दिया सम्मान सेक्टर 5 स्थित मुक्तिधाम में उनके पुत्र मदन कर्ष ने मुखाग्नि दी। इस अवसर पर बालको क्षेत्र और आसपास के बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। हेतराम अपने पीछे पुत्र, पुत्रवधू, बेटी, दामाद और नाती-पोतों का परिवार छोड़ गए हैं। राजकीय सम्मान समारोह में सशस्त्र बल के जवानों की टुकड़ी, पुलिस लाइन के प्रभारी आरआई अनथ राम पैंकरा और बालको थाना प्रभारी टीआई अभिनव कांत सिंह उपस्थित थे। उन्होंने हेतराम के पार्थिव शरीर पर तिरंगा और पुष्प माला अर्पित की।

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