विधानसभा में बजट सत्र के चौथे दिन प्रदेश में संचालित शराब दुकानों और अहाता निर्माण पर सत्तापक्ष के विधायकों ने अपनी ही सरकार के मंत्री को घेरा। विधायकों ने धार्मिक स्थलों, स्कूलों, कॉलोनियों और सर्विस रोड के पास संचालित दुकानों को लेकर आपत्ति जताई। भाजपा विधायक सुनील सोनी ने कहा कि कटोरा तालाब राजधानी रायपुर का अत्यंत व्यस्त मार्ग है, जहां मेन रोड पर संचालित शराब दुकान एक ही दीवार से मंदिर से सटी हुई है। वहां बनाए गए अहाते के कारण लोगों का जमावड़ा रहता है, जिससे छेड़खानी और आपराधिक गतिविधियों की शिकायतें मिल रही हैं। इसी तरह भाटागांव और संतोषी नगर में सर्विस रोड पर स्थित दुकानों से महिलाओं को आने-जाने में परेशानी होती। भाजपा विधायक सुशांत सिंह ने कहा कि बीरकोना में जल संसाधन विभाग की जमीन पर कब्जा करके चखना का दुकान खोला गया है। भाजपा विधायक राजेश मूणत ने पूछा कि क्या शराब दुकान खोलने के पूर्व कोई सर्वे होता है। दुकान खोलने के पहले कोई आपत्ति आती है क्या? विधायक अनुज शर्मा ने खरोरा-कटिया रोड और लाभांडी क्षेत्र की दुकानों को हटाने की मांग दोहराई, जबकि विधायक रिकेश सेन ने प्रधानमंत्री आवास योजना क्षेत्र में शराब दुकान खोले जाने पर आपत्ति जताई। आबकारी मंत्री ने कहा कि प्रदेश की सभी शराब दुकानों के स्थालों की जांच करने के निर्देश कुछ दिन पहले दिए गए। जांच रिपोर्ट के बाद जिन शराब दुकानों का संचालन आपत्तिजनक स्थलों पर किया जा रहा है, उसे स्थानांतरित किया जाएगा।
विधायक शुक्ला और श्रीवास्तव आमने-सामने
बजट पर सामान्य चर्चा के दौरान भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला और कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव आमने-सामने आ गए। दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिससे सदन का माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। काफी देर तक दोनों के बीच बहस होती रही। इससे नाराज होकर शुक्ला रो पड़े। इसके बाद सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए रोकनी पड़ी। पूर्व मंत्री चंद्राकर और मंत्री जायसवाल के बीच मशीन पर नोकझोंक
विधानसभा में मशीन खरीदी को लेकर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के बीच तीखी नोकझोंक हुई। अजय चंद्राकर ने कहा कि उन्हें पेट स्कैन और गामा कैमरा मशीनों की अधूरी जानकारी दी गई। पिछले सत्र में मशीनों को सेटअप का हिस्सा बताया गया था, जबकि अब कहा जा रहा है कि वे शामिल नहीं हैं। उन्होंने चर्चा अगले दिन शिफ्ट करने की मांग की। इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि दोनों उत्तर सही हैं। जांच में सामने आया है कि मशीनों की वित्तीय स्वीकृति नहीं ली गई थी, इसलिए वे अधिकृत सेटअप का हिस्सा नहीं मानी जा सकतीं। चंद्राकर: यदि यह सेटअप में शामिल नहीं है, तो वह मशीन कहां है, किसकी है यह बता दें। जायसवाल: वित्तीय स्वीकृति नहीं, इसलिए जांच करा रहे है। मेकाहारा में रखी हुई है। बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने चुटकी लेते हुए पूछा कि वह कौन सा समय है जब बिना वित्तीय स्वीकृति के मशीन खरीद लिया गया है यही बता दें। तब हमलोग समझ जाएंगे कि इधर के हैं या उधर का है।
श्याम बिहारी जायसवाल बोले- यह पूर्व का है, इसका समय बाद में बता दूंगा। 1496 इनामी नक्सलियों को 5.64 करोड़ का भुगतान विधानसभा में नक्सल पुनर्वास नीति को लेकर सवाल-जवाब हुए। कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा से नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास राशि को लेकर जानकारी मांगी। मंडावी ने कहा कि प्रश्न का उत्तर उन्हें सदन में चर्चा से कुछ देर पहले ही मिला, ऐसे में प्रश्न को अगले दिवस के लिए बढ़ाया जाना चाहिए। हालांकि, फिर उन्होंने सवाल पूछा। जवाब में उप मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि प्रदेश में कुल 2937 नक्सलियों का पुनर्वास हुआ है, जिनमें 1496 इनामी नक्सली शामिल हैं। इन 1496 नक्सलियों के लिए कुल 5 करोड़ 64 लाख रुपए की इनामी राशि निर्धारित है।


