राजस्व विभाग के अधीन आयुक्त भू अभिलेख दफ्तर का पुनर्गठन किया जाएगा। इसको लेकर लंबे समय से चल रही कवायद अब मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ बैठक के बाद अब राजस्व विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव से इसको लेकर अलग-अलग बिन्दुओं पर बात की है और उसे सीएम के निर्देश के आधार पर पुनर्गठन प्रक्रिया में शामिल करने को कहा है। आयुक्त भू अभिलेख (कमिश्नर लैंड रिकार्ड) का मुख्यालय अभी ग्वालियर में है। जहां पुराने सेटअप के हिसाब से अफसरों की टीम पदस्थ है। अब बदलती परिस्थिति में इस विभागाध्यक्ष कार्यालय का पुनर्गठन करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही इस कार्यालय के कामकाज को लेकर प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय में और अधिक समन्वय पर फोकस किया जाना है। इसी को लेकर राजस्व विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ आज सीएस और प्रमुख राजस्व आयुक्त बैठक के लिए पहुंचे। मुख्यमंत्री यादव ने केंद्र सरकार की गाइडलाइन के आधार पर इस विभागाध्यक्ष कार्यालय के गठन की प्रक्रिया को लेकर निर्देश दिए हैं। इसके बाद अब जल्दी ही एक और बैठक इसको लेकर सीएम की मौजूदगी में हो सकती है। अनुपयोगी हो चुके पद खत्म होंगे, आईटी के पद बढ़ेंगे राजस्व विभाग की रीढ़ के तौर पर काम कर रहे सीएलआर और पीआरसी दफ्तर में कई पदों का सृजन किए जाने की भी तैयारी है। सरकार इसे कैबिनेट में लाकर पदों को मंजूरी देगी। ये नए पद नए नाम से लाए जाएंगे। जिसे प्रक्रिया के आधार पर भरा जाएगा। इसमें आईटी से संबंधित पद अधिक बताए जा रहे हैं। यह पद पीआरसी और सीएलआर दोनों ही दफ्तरों में बढ़ेंगे। इसके अलावा सीएलआई दफ्तर में जो पद अनुपयोगी हो चुके हैं, उन्हें डाइज कैडर में डालकर खत्म करने की कवायद भी की जा रही है। पीआरसी और सीएलआर के मर्ज करने पर भी चर्चा सीएलआर आफिस को लेकर यह कवायद करीब एक साल से चल रही है। जिसमें प्रमुख राजस्व आयुक्त (पीआरसी) और सीएलआर दफ्तर को मर्ज करने की भी बात कही गई थी। साथ ही दोनों ही विभागों का प्रमुख एक ही अफसर को बनाए जाने की बात आई थी, लेकिन बताया जाता है कि अब ऐसा नहीं हो रहा है। सीएलआर का दफ्तर ग्वालियर के साथ भोपाल में भी रखने की तैयारी है।


